KGMU दवा घोटाला: विभागाध्यक्ष प्रो. अपुल गोयल हटाए गए, 3 कर्मचारी बर्खास्त

लखनऊ KGMU के यूरॉलॉजी विभाग में 2.50 करोड़ का दवा घोटाला। कुलपति ने विभागाध्यक्ष को हटाया, 3 कर्मचारी बर्खास्त और फार्मासिस्ट निलंबित। जानें कैसे हुआ फर्जीवाड़ा।

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के यूरॉलॉजी विभाग में कैंसर, किडनी और अन्य गंभीर बीमारियों की महंगी दवाओं के कथित घोटाले में कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सख्त कार्रवाई करते हुए विभाग के प्रमुख प्रो. अपुल गोयल को तत्काल प्रभाव से विभागाध्यक्ष पद की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है. जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलते ही यह ऐक्शन लिया गया. जांच के आठवें दिन कुलपति ने यह फैसला लिया. साथ ही घोटाले में शामिल तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है और उनकी एजेंसी से रकम वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है.

कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने जनरल सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. एचएस पाहवा को यूरॉलॉजी विभाग का कार्यवाहक विभागाध्यक्ष नियुक्त किया है. वे अगले आदेश तक विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे.

घोटाले की रूपरेखा

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, विभाग में असाध्य योजना (दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए सरकारी योजना) के तहत हर महीने औसतन 10 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती थीं. इस वर्ष खरीद मात्रा तीन-चार गुना बढ़ गई. बीते महीने अकेले 45 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गईं, जिस पर शक होने पर प्रशासन ने जांच शुरू की. 26 मई को जांच समिति गठित की गई थी. समिति ने मंगलवार को कुलपति को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में सरकारी योजनाओं के संचालन और दवाओं की खरीद-आपूर्ति में गंभीर अनियमितताओं के साक्ष्य मिलने की पुष्टि हुई है. प्रारंभिक जांच में लगभग 2.50 करोड़ रुपये की दवाओं के गबन और दुरुपयोग की बात सामने आई है.

फर्जीवाड़े का तरीका

40 ऐसे मरीज पाए गए जिनके नाम पर रिकॉर्ड में बार-बार भर्ती दिखाई गई, जबकि वास्तव में दवाओं का इस्तेमाल नहीं हुआ. असाध्य योजना में पंजीकृत गरीब मरीजों की UHID (यूनिक हेल्थ आईडी) का दुरुपयोग किया गया. एक कर्मचारी फर्जी ओपीडी पर्ची बनाता था. दूसरे कर्मचारी उसी पर्ची पर कैंसर व अन्य महंगी दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन लिखता था. तीसरा कर्मचारी इंडेंट (मांग) हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड कार्यालय भेजता था. दवाएं आने के बाद उन्हें स्टोर से निकलवा लिया जाता था और बाद में मरीजों को कागजों पर भर्ती दिखाकर खपत साबित की जाती थी. वास्तविक मरीजों को दवाएं दिए बिना इन्हें बाहर बेच दिया जाता था.

केजीएमयू के प्रवक्ता केके सिंह ने बताया कि दवा घोटाले में शामिल आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पी. सिंह, एच. श्रीवास्तव और एस. तिवारी को बर्खास्त कर दिया गया है. तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है. नियमित फार्मासिस्ट अरशद वासी को निलंबित कर उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है. घोटाले की रकम की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

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