NIA की बड़ी कार्रवाई: कंबोडिया मानव तस्करी रैकेट के ठिकानों पर छापेमारी

NIA ने बिहार, यूपी और दिल्ली में 6 ठिकानों पर छापेमारी की। कंबोडिया मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी रैकेट का भंडाफोड़। जानें कैसे युवाओं को बनाते थे शिकार।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (7 जुलाई) को कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी (Cyber Slavery) रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कुल 6 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए.

जानकारी के मुताबिक NIA ने बिहार के गोपालगंज, सीवान, सारण और पूर्वी चंपारण में एक-एक स्थान के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी एक-एक ठिकाने पर तलाशी ली. ये सभी ठिकाने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों और फरार आरोपियों के सहयोगियों से जुड़े बताए गए हैं.

छापेमारी में क्या मिला?

छापेमारी के दौरान NIA कई स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए. इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की गई.जब्त सामान की फोरेंसिक जांच के जरिए पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है.

मास्टरमाइंड की तलाश जारी

NIA के अनुसार इस अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का मास्टरमाइंड आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह है जो अभी भी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है. बताया जा रहा है कि मई 2026 में NIA ने आनंद कुमार सिंह समेत उसके चार सहयोगियों प्रह्लाद कुमार सिंह, अभयनाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इससे पहले फरवरी 2026 में आनंद के तीन सहयोगियों अभयनाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव को कंबोडिया से दिल्ली लौटने पर गिरफ्तार किया गया था.

नौकरी का झांसा देकर भेजते थे कंबोडिया

जांच में सामने आया है कि यह संगठित गिरोह भारतीय युवाओं को विदेश में अच्छी तनख्वाह वाली वैध नौकरी का लालच देकर कंबोडिया भेजता था. कंबोडिया पहुंचने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट छीन लिए जाते थे और उन्हें फर्जी ऑनलाइन फ्रॉड करने वाली कंपनियों के हवाले कर दिया जाता था. जांच के मुताबिक गिरोह भारत में ट्रैवल एजेंटों और सब-एजेंटों के जरिए बेरोजगार और जरूरतमंद युवाओं की भर्ती करता था और फिर उन्हें विदेश भेज देता था.

मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना

पीड़ितों ने अपने बयान में बताया कि उन्हें कंबोडिया में साइबर ठगी करने वाली कंपनियों में जबरन काम करने के लिए मजबूर किया जाता था. पीड़ितों के मुताबिक अगर कोई काम करने से इनकार करता था तो उसे बुरी तरह प्रताणित किया जाता था .पीड़ितों ने बताया कि उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, बिजली के झटके, जबरन बंदी बनाकर रखना, खाना और पानी तक न देना जैसी अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं.

NIA की जांच जारी

NIA ने कहा है कि फरार आरोपियों और इस अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी एवं साइबर स्लेवरी नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश लगातार जारी है. एजेंसी पूरे सिंडिकेट की वित्तीय और तकनीकी गतिविधियों की भी जांच कर रही है.

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