Share Market Crash: सेंसेक्स 890 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे 4.47 लाख करोड़; ये हैं 6 बड़े कारण

शेयर बाजार में कोहराम! ईरान-अमेरिका तनाव और FII की बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी 1% से ज्यादा गिरे। जानें वो 6 कारण जिन्होंने निवेशकों के 4.47 लाख करोड़ रुपए डुबो दिए।

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिसमें बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 1 फीसदी से ज्यादा गिर गए. ईरान-अमेरिका वॉर को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, FII की लगातार बिकवाली और दूसरे कारणों से निवेशकों का मूड खराब हो गया. सुबह 9.35 बजे तक सेंसेक्स 890 अंक गिरकर 73,759.94 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 239 अंक गिरकर 23,244.45 पर पहुंच गया. ऐसा तब हुआ जब India VIX, जो बाजार में उतार-चढ़ाव को मापता है, ट्रेडिंग के दौरान 8 फीसदी से ज्यादा उछलकर 16.62 पर पहुंच गया.

IT शेयरों में आज ज़बरदस्त तेजी के बाद गिरावट देखने को मिली. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और इंफोसिस के शेयर 2-5% तक गिर गए, जिससे सेंसेक्स में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ. वहीं, अडानी पोर्ट 1 फीसदी बढ़कर सबसे ज़्यादा फायदे में रहा. बाजार में गिरावट का माहौल हर तरफ फैला हुआ दिखाई दिया. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में क्रमशः 0.7% और 0.5% की गिरावट आई. सेक्टर के हिसाब से, निफ्टी आईटी 4% गिरकर सबसे ज़्यादा नुकसान में रहा. एनएसई पर करीब 1,634 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 913 शेयरों में तेज़ी आई और 84 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

खास बात तो ये है कि इस गिरावट की वजह से शेयर बाजार की वैल्यूएशन में 4,47,165.35 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया. एक दिन पहले बीएसई का वैल्यूएशन 4,62,67,787.61 करोड़ रुपए था, जोकि करीब 20 मिनट के भीर 4,58,20,622.26 करोड़ रुपए पर आ गया. इसका मतलब है कि निवेशकों को मोटा नुकसान हो चुका है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वो 6 कारण कौन ये है कि जिसकी वजह से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है.

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस भरोसे के बावजूद कि अमेरिका और ईरान अपने तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के करीब पहुंच रहे हैं, तेल से समृद्ध मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है. इजराइल लेबनान पर हमले जारी रखे हुए है, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच नाजुक युद्धविराम खतरे में पड़ गया है, जबकि ईरान ने पड़ोसी देशों पर मिसाइलें दागी हैं.

इस बीच, अमेरिकी सेना ने मंगलवार को कहा कि उसने खाड़ी में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक सीरीज को “सफलतापूर्वक नाकाम” कर दिया है और देश के केशम द्वीप पर आत्मरक्षा में हमले किए हैं. सेंटकॉम ने यह भी कहा कि ईरान द्वारा “नागरिक नाविकों की ओर” छोड़े गए तीन हमलावर ड्रोनों को मार गिराया गया है.

तेल की कीमतें बढ़ीं

तनाव के परिणामस्वरूप, तेल की कीमतें बढ़ गईं. ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1% बढ़कर $97 प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. इस बीच, WTI क्रूड वायदा भी लगभग 1% बढ़कर $95 प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. मध्य पूर्व में लगातार कमजोर होते युद्धविराम ने होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय तक बंद रहने की चिंताओं को बढ़ा दिया है. यह 33 किलोमीटर का एक संकरा जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के दैनिक तेल और गैस शिपमेंट के 20 फीसदी से अधिक का परिवहन करता है.

रुपया कमजोर हुआ

बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे गिरकर 95.50 पर आ गया. एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट – कमोडिटी और करेंसी, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई के दृष्टिकोण को लेकर चिंताएं बढ़ा रही हैं, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में धारणा सतर्क बनी हुई है. उन्होंने आगे कहा कि आगे चलकर, बाजार RBI की पॉलिसी के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा… रुपए की चाल डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतों और पूंजी प्रवाह से प्रभावित होती रहेगी. तकनीकी रूप से, 94.85 एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर बना हुआ है, जबकि 95.75 अगला प्रमुख समर्थन क्षेत्र है.

FII की बिकवाली जारी

विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी के नेट सेलर बने रहे. मंगलवार को दलाल स्ट्रीट पर उन्होंने करीब 8,363 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. यह 29 मई को सिर्फ़ एक सेशन में हुई 22,102 करोड़ रुपए की भारी बिकवाली और 1 जून को हुई 3,843 करोड़ रुपए की बिकवाली के बाद हुआ.

बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच US ट्रेजरी यील्ड में थोड़ी बढ़ोतरी हुई. बेंचमार्क US 10-साल के नोट पर यील्ड बढ़कर 4.457 फीसदी हो गई, जबकि 30-साल के बॉन्ड पर यील्ड बढ़कर 4.97% हो गई. 2-साल के नोट पर यील्ड, जो आम तौर पर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों के साथ-साथ चलती है, बढ़कर 4.056% हो गई. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आम तौर पर बॉन्ड निवेशकों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो जाते हैं, जिससे बदले में बाज़ारों में कुछ गिरावट आ सकती है.

IT शेयरों में गिरावट

बाजार में गिरावट की वजह आईटी शेयरों में भारी बिकवाली भी हो सकती है. इन शेयरों में पहले, पूरे बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, लगातार कई सेशन में तेजी देखी गई थी. निफ्टी आईटी इंडेक्स मंगलवार को 4 फीसदी से ज्यादा उछला और मई 2026 के बाद से एक दिन में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की. इंडेक्स सिर्फ तीन सेशन में करीब 8 फीसदी चढ़ा, जबकि इसी दौरान निफ्टी 50 में 2 फीसदी की गिरावट आई. इस तेज उछाल की वजह से आज बड़े IT शेयरों में कुछ प्रॉफिट बुकिंग हुई होगी, जिसका असर पूरे बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा.

क्या कह रहे हैं जानकार?

जियोजित इंवेसटमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के थोड़ा और बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से बढ़कर 97 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत को ऊर्जा संकट से कोई राहत नहीं मिलने वाली है. 5 जून को आरबीआई के पॉलिसी ऐलान बाजार की पैनी नजर रहेगी.

उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर की बड़ी कंपनियों वाले देश – दक्षिण कोरिया और ताइवान – में तेजी का दौर बिना किसी रुकावट के जारी है. उन्होंने समझाया कि सैमसंद, SK Hynix और TSMC जैसी बड़ी कंपनियां, जिनके पास कीमतों पर जबरदस्त पकड़ है, इस साल और शायद अगले साल भी बहुत शानदार मुनाफा कमाने की उम्मीद है. यह एक सच्चाई है कि इन बाजारों के साथ-साथ अमेरिका और जापान के बाजारों में भी तेजी का दौर, मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीदों से ही चल रहा है.

इसके उलट, विजयकुमार ने कहा कि भारत में वित्त वर्ष 2027 में मुनाफे में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है, जिसकी वजह धीमी आर्थिक विकास दर और बढ़ती महंगाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि इन सभी कारणों का असर बाजार के माहौल पर पड़ा है. राहत की बात यह है कि रिटेल निवेशकों ने जो भरोसा दिखाया है, वे मुश्किल हालात के बावजूद लगातार पैसे निवेश कर रहे हैं. भले ही FPI का लगातार बाहर जाना एक बड़ी रुकावट है, लेकिन सही वैल्यूएशन, Q4 के आंकड़ों में दिखी कमाई में बढ़ोतरी और घरेलू निवेश का मजबूत प्रवाह बाजार को मजबूती दे सकता है.

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