Taliban vs Shia: तालिबान में गृहयुद्ध की आहट! शिया धर्मगुरुओं की गिरफ्तारी से भड़का आक्रोश
तालिबान सरकार ने दर्जनों शिया धर्मगुरुओं को किया गिरफ्तार। अस्थाई विवाह और जाफरी प्रथाओं पर रोक से भड़का शिया समुदाय। क्या अफगानिस्तान में छिड़ेगा बड़ा गृहयुद्ध?
तालिबान में शिया और सुन्नी के बीच की अदावतें तेज होती जा रही हैं. हाल ही में तालिबान की सरकार ने अस्थाई विवाह संपन्न कराने के आरोप में दर्जनों शिया धर्मगुरुओं को हिरासत में लिया है. इसके बाद तालिबान के शीर्ष शिया धर्मगुरु हुसैनदाद शरीफी ने सांप्रदायिक हिंसा भड़कने की चेतावनी दी है. शरीफी का कहना है कि जिस तरीके से तालिबान की सरकार शिया समुदाय के अधिकारों को छीन रही है, उससे यहां पर बड़ी लड़ाई छिड़ सकती है.
अमु टीवी के मुताबिक शिया समुदाय 3 बड़े कारणों से नाराज है. पहला कारण, तालिबान प्रशासन का नया कानून है. इसमें शिया समुदाय के नियमों को शामिल नहीं किया गया है. इसी तरह तालिबान की सरकार ने जाफरी धार्मिक प्रथाओं पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी है.
विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया, जब शिया समुदाय के दर्जनों विद्वानों को इसलिए हिरासत में ले लिया गया, क्योंकि उनपर नियम तोड़कर शादी कराने के आरोप थे. इन सभी से घंटों पूछताछ की गई. तालिबान शासन के मुताबिक ये सभी धार्मिक गुरु अस्थाई शादी करा रहे थे, जिस पर अफगानिस्तान में प्रतिबंध है.
धर्म के पालन करने पर रोक की कोशिश- शरीफी
शरीफी ने कहा कि मुझ पर अपने धर्म के पालन नहीं करने का दबाव डाला जा रहा है. मैं चाहता हूं कि सरकार इसकी सार्वजनिक तौर पर घोषणा कर दे. अगर ऐसा होता है तो हम आगे का देखेंगे. उन्होंने आगे कहा कि तालिबान शासन शिया धर्मगुरुओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है.
शरीफी के मुताबिक पहले धर्मगुरुओं को पुलिस स्टेशन पर ले जाया जा रहा है. फिर उससे कहा जा रहा है कि आप अपने धर्म का पालन न करें. उन्होंने इसे शिया के धार्मिक मान्यताओं का अपमान बताया है.
शरीफी के मुताबिक अस्थाई विवाह पर तालिबान की सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है. हमारे लोगों से कहा जा रहा है कि अगर उसने अस्थाई विवाह कराया, तो उसे उम्रकैद की सजा दी जाएगाी. यह सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने का कृत्य है.
अफगानिस्तान की पीपुल्स इस्लामिक यूनिटी पार्टी के नेता मोहम्मद मोहकिक का कहना है कि अगर लड़ाई छिड़ती है तो यह तालिबान का सबसे बड़ा गृहयुद्ध होगा. ऐसा गृहयुद्ध पहले कभी नहीं देखा गया है.
तालिबान में शिया और सुन्नी के बीच विवाद
तालिबान में सुन्नी समुदाय की आबादी 85 प्रतिशत के आसपास है. सुन्नी बहुसंख्यक है और यहां पर इसी की सत्ता है. शिया समुदाय 10-12 प्रतिशत के बीच है. तालिबान की सरकार में सुन्नी समुदाय के 99 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी हैं. यानी सरकार में सुन्नी की पकड़ काफी मजबूत है. तालिबान का जो नया कानून है, वो भी सुन्नी मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है.