यमुना सिटी बनेगी दवा कारोबार और टेक हब, 500 इलेक्ट्रिक बसें और इंटरनेशनल स्टेडियम मंजूर
यमुना प्राधिकरण की 92वीं बोर्ड बैठक में सेक्टर-6 में ताइवान सिटी, फार्मा क्लस्टर, यूनिवर्सिटी पार्क और 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में ताइवान सिटी और मेडिकल हब विकसित करने को मंजूरी दे दी गई। सेक्टर-6 में 300 एकड़ में ताइवान आधारित कंपनियों को और सेक्टर-13 और 14 में 500 एकड़ में मेडिकल कंपनियों को प्लॉट आवंटित होंगे।
यीडा की 92वीं बोर्ड बैठक में ताइवान आधारित औद्योगिक इकाइयों के लिए ताइवान सिटी बसाने का प्रस्ताव पेश किया गया था। ताइवान दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आईसीटी और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन की प्रमुख कड़ी है। ऐसे में इन कंपनियों की दस्तक से यीडा क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, तकनीकी उत्पादों और उनसे जुड़े उद्योगों का इकोसिस्टम विकसित होगा, जिससे निवेश, रोजगार और स्थानीय सप्लाई चेन को गति मिलेगी।
परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़े वैश्विक निर्माताओं की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। ताइवान के तकनीकी उद्योगों का वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति तंत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े उद्योगों का समूह विकसित होने से कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक की पूरी औद्योगिक शृंखला तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे यीडा की पहचान देश के उभरते टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और मजबूत होगी।
यमुना सिटी दवा कारोबार का बड़ा केंद्र बनेगी
उत्तर प्रदेश को अग्रणी फार्मा विनिर्माण हब के रूप में विकसित करने के लिए यमुना सिटी के सेक्टर-6 में 100 से 125 एकड़ में फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इस क्लस्टर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) के अनुरूप दवा निर्माण करने वाली राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की दवा इकाइयों को भूमि आवंटित की जाएगी। क्लस्टर में मुख्य तौर पर टैबलेट, कैप्सूल, इंजेक्टेबल यानी इंजेक्शन, ओरल लिक्विड यानी सिरप, ट्रॉपिकल प्रिपरेशन यानी ऐसी दवाएं जोकि शरीर के बाहरी हिस्सों जैसे त्वचा या आंखों पर लगाई जाती हैं। इनमें क्रीम, जेल, लोशन व मलहम आदि शामिल हैं, इनके निर्माण के लिए औषधि निर्माण इकाइयों को स्थापित किया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश को अग्रणी फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जा सके।
टेस्टिंग सुविधाएं विकसित होंगी
यीडा के मेडिकल डिवाइस पार्क में एफडीए अनुरूपता मूल्यांकन के लिए प्रत्यायन योजना के अनुरूप मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना एवं परियोजना के तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत पहलुओं के परिक्षण के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी के गठन का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ है। बताया गया कि भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माता को उत्पादों के परीक्षण एवं अनुरूपता मूल्यांकन के लिए विदेश स्थित लैब पर निर्भर रहना पड़ता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षण की सुविधा स्थापित होने से चिकित्सा उपकरण निर्माता एवं एमएसएमई को अत्याधिक लाभ होगा, जिससे निर्यात तथा निवेश आर्कषित होगा। इस सुविधा में विद्युत सुरक्षा, विद्युतचुंबकीय अनुकूलता, यांत्रिक प्रदर्शन, सॉफ्टवेयर सत्यापन, कीटाणुशोधन व पैकेजिंग सत्यापन सुविधाए मेडिकल डिवाईस पार्क के आवंटियों के साथ-साथ देशभर के चिकित्सा उपकरण निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण सेवाए उपलब्ध कराई जा सकेगी। बोर्ड बैठक में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, यीडा सीईओ आरके सिंह, एसीईओ राजेश कुमार, शैलेंद्र भाटिया व मनीष मीणा, जीएम परियोजना राजेंद्र भाटी समेत ओएसडी आदि मौजूद रहे।
सेक्टर-34 में मंडी स्थापित होगी
यीडा के सेक्टर-34 में करीब 36 एकड़ भूमि पर मंडी स्थापित करने की योजना है। इसका प्रस्ताव भी पास हो गया है। यह नोएडा फेज-1 फूल मंडी की तर्ज पर स्थापित होगी। सेक्टर 14 में 480 एकड़ में यूनिवर्सिटी पार्क बनेगा, जहां देश विदेश के बड़े विश्वविद्यालयों को जमीन दी जाएगी। साथ ही, सेक्टर-23डी में 50 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनेगा।
जिले में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 500 होगी
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दृष्टिगत तीनों प्राधिकरण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 500 किए जाने के आदेश दिए गए हैं। इसके लिए अपर मुख्य सचिव ने अलग से तीनों प्राधिकरणों को पत्र जारी किया है। वहीं, अपर मुख्य सचिव ने यीडा के सेक्टर-23सी में अंतरराज्जीय बस अड्डे को भी मंजूरी दे दी है।
विश्व बैंक से वित्तीय सहायता लेने पर विचार
मेडिकल हब में अस्पतालों और क्लीनिक रिसर्च एवं ट्रायल हब, डिजिटल हेल्थ हब व बायोटेक एवं फार्मा सेंटर, स्वास्थ्य वृद्धावस्था केंद्र तथा नर्सिंग एवं अन्य को भूमि दी जाएगी। इसके लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग को प्रेषित करने तथा विश्व बैंक से तीन हजार करोड़ की आईबीआरडी वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए विचार किया गया।
प्राधिकरण क्षेत्र में नदी पर पुल बनाने की तैयारी
आगरा स्थित प्राधिकरण क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे की चैनेज 161.21 पर सर्विस रोड पर करबन नदी के ऊपर कलवर्ट (माईनर ब्रिज) निर्माण कार्य को भी मंजूरी मिल गई है। वर्षा के दौरान वर्तमान में जलभराव के कारण सर्विस रोड पर आवागमन बाधित हो जाता है, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी असुविधा होती है।
भूमि खरीद पर सबसे अधिक रकम खर्च
यमुना प्राधिकरण ने सबसे अधिक खर्च भूमि खरीद पर किया है। वर्ष 2025-26 में जहां 1308.57 करोड़ खर्च हुए थे, वहीं वर्ष 2026-27 में 31 जुलाई तक 3690.64 करोड़ राशि खर्च की जा चुकी। इनमें 1385 करोड़ भूमि खरीद पर खर्च हुआ।