अदालत में हंगामा और तोड़फोड़ करने वाले वकीलों पर HC सख्त, अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत परिसर के भीतर हंगामा, नारेबाजी और तोड़फोड़ करने वाले वकीलों के खिलाफ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन वकीलों पर बेहद सख्त रुख अपनाया है, जिन्होंने अदालत परिसर के भीतर न केवल जमकर नारेबाजी की बल्कि न्यायिक कार्यवाही में भी गंभीर बाधा डाली। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए उपद्रव करने वाले ऐसे सभी लोगों की शिनाख्त की जाए और उनके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही तुरंत शुरू की जाए।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र प्रेषित कर आरोप लगाया कि जस्टिस अजय भनोट ने एक वकील से पुलिस अधीक्षक (SP) से माफी मांगने को कहा था और ऐसा न करने पर जेल भेजने की चेतावनी दी थी। इस बात से नाराज होकर वकीलों ने बुधवार को जस्टिस भनोट की अदालत का पूर्ण बहिष्कार कर दिया और कोर्ट रूम के बाहर भारी हंगामा किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी वकीलों पर अदालत के भीतर फर्नीचर फेंकने और तोड़फोड़ करने जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं।
🚫 ‘यह पूरी तरह से कोर्ट की अवमानना है’— जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच की टिप्पणी
वकीलों के इस हंगामे और उपद्रव का असर बगल वाले कोर्ट रूम यानी जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच की न्यायिक कार्यवाही पर भी पड़ा।
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अदालत की नाराजगी: जस्टिस देशवाल ने वकीलों के इस अमर्यादित व्यवहार को ‘पूरी तरह से अदालत की अवमानना’ करार दिया।
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रजिस्ट्रार को निर्देश: कोर्ट ने रजिस्ट्रार को सख्त आदेश दिया है कि वे तत्काल सीसीटीवी फुटेज खंगालें, नारेबाजी और तोड़फोड़ में संलिप्त वकीलों की पहचान करें और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक तथा अवमानना की कार्यवाही की पुख्ता तैयारी करें।
📜 बार काउंसिल को भेजा जाएगा मामला, अगली सुनवाई 19 नवंबर को
अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पहचान पूरी होने के बाद, उन संबंधित वकीलों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पूरा मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेज दिया जाएगा। इसके साथ ही, अदालत की अवमानना के तहत भी कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।
👨⚖️ कौन हैं न्यायमूर्ति अजय भनोट? जानिए उनका पूरा कानूनी सफर
जिन न्यायाधीश को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है, आइए उनके बारे में जानते हैं:
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परिचय व शिक्षा: न्यायमूर्ति अजय भनोट इलाहाबाद हाई कोर्ट के सम्मानित स्थायी न्यायाधीश हैं और वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 4 अगस्त 1969 को जन्मे न्यायमूर्ति भनोट ने वर्ष 1994 में लखनऊ विश्वविद्यालय से अपनी कानून (LLB) की डिग्री पूरी की और 15 जनवरी 1995 को एक अधिवक्ता (Advocate) के रूप में अपना पंजीकरण कराया।
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वकालत का अनुभव: उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबी और व्यापक वकालत की। इस दौरान उन्होंने दीवानी (सिविल), संवैधानिक, कर (Tax), सेवा, कंपनी और आपराधिक कानून से जुड़े तमाम जटिल मामलों के साथ-साथ पर्यावरण और औद्योगिक विवादों से जुड़े मुकदमों को भी बहुत प्रभावी ढंग से संभाला।
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महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां: अपने शानदार कानूनी करियर के दौरान, उन्होंने भारत सरकार के वकील, उत्तर प्रदेश सरकार के लिए स्थायी व अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता, और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के वकील के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
📅 वरिष्ठ अधिवक्ता से जज बनने का सफर और सेवानिवृत्ति की तारीख
कानूनी क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान को देखते हुए 23 मई 2015 को उन्हें ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ (Senior Advocate) के रूप में नामित किया गया था।
इसके पश्चात, 22 सितंबर 2017 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और आगे चलकर 6 सितंबर 2019 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में औपचारिक शपथ ग्रहण की। न्यायिक सेवा के नियमों के अनुसार, न्यायमूर्ति अजय भनोट 3 अगस्त 2031 को अपने पद से सेवानिवृत्त होंगे।