दिवाली की सफाई के दौरान घर से मिले उल्लू के 6 बच्चे, वन विभाग की देखरेख में खा रहे हैं रोज 1 किलो चिकन
बिजनौर में दिवाली की साफ-सफाई के दौरान एक घर से बार्न आउल प्रजाति के छह बच्चे मिले हैं। वन विभाग की टीम इन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर इनकी विशेष देखभाल कर रही है।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दीपावली के पावन पर्व को लेकर चल रही घरों की साफ-सफाई के दौरान एक बेहद दिलचस्प और अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक मकान की सफाई करते वक्त उल्लू के छह बच्चे मिलने से हड़कंप भी मचा और कौतूहल का विषय भी बन गया।
मकान मालिक ने इन बेजुबान पक्षियों को परेशानी में देखकर बिना देर किए तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही सक्रिय हुई वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी छह बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अपने संरक्षण में ले लिया है। फिलहाल ये सभी नन्हें मेहमान वन विभाग के रेंज कार्यालय में सुरक्षित रह रहे हैं, जहां उनकी विशेष देखभाल की जा रही है। इन मेहमानों के खाने-पीने से लेकर उनकी दैनिक दिनचर्या तक का पूरा ख्याल रखा जा रहा है और इन्हें रोज लगभग एक किलो चिकन खाने को दिया जा रहा है।
🏠 कृष्ण विहार कॉलोनी की घटना, जाली के कारण मां तक नहीं पहुंच पा रहे थे बच्चे
यह पूरा मामला शहर की कृष्ण विहार कॉलोनी का है। यहाँ रहने वाले जगदीश कुमार के घर में दिवाली के मद्देनजर साफ-सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान जब मकान के एक पुराने झरोखे की सफाई की जाने लगी, तो वहां उल्लू के छह छोटे-छोटे बच्चे दिखाई दिए।
जब उन्होंने ध्यान से देखा तो समझ आया कि उस झरोखे पर जाली लगी हुई थी, जिसके कारण उल्लुओं की मां अपने बच्चों तक चाहकर भी नहीं पहुंच पा रही थी। बच्चों की सुरक्षा को खतरे में भांपते हुए जगदीश कुमार ने घबराने के बजाय सूझबूझ दिखाई और तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्परता से मौके पर पहुँची और सभी छह बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालकर अपने साथ ले आई।
🦅 बार्न आउल (Barn Owl) प्रजाति के हैं सभी 6 बच्चे, चार नर और दो मादा शामिल
वन क्षेत्राधिकारी महेश गौतम के अनुसार, रेस्क्यू किए गए सभी छह उल्लू ‘बार्न आउल’ प्रजाति के हैं। इनमें चार नर और दो मादा शामिल हैं। इन सभी की उम्र करीब ढाई महीने बताई जा रही है।
फिलहाल इन्हें दो सुरक्षित पिंजरों में रखा गया है, जहां वन विभाग के विशेषज्ञ कर्मचारी लगातार इनकी निगरानी कर रहे हैं। प्राकृतिक और खुले वातावरण से दूर रहने के बावजूद इन्हें किसी भी तरह की मानसिक या शारीरिक परेशानी न हो, इसके लिए विभाग इनकी सेहत का विशेष ध्यान रख रहा है।
🌙 शाम ढलते ही शुरू होती है भोजन की सक्रियता, अब रोज लग रही एक किलो चिकन की खुराक
इन अनोखे मेहमानों की दिनचर्या भी आम पक्षियों से काफी अलग है। ये आमतौर पर दिन के समय आराम करते हैं और सूरज ढलने के बाद अंधेरा होने पर अपने भोजन की तलाश में सक्रिय होते हैं।
इसी प्राकृतिक आदत को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की टीम इन्हें हमेशा शाम के समय ही भोजन उपलब्ध कराती है:
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शुरुआती खुराक: शुरुआत में इन छह बच्चों को करीब आधा किलो चिकन खाने के लिए दिया गया था।
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बढ़ी हुई मात्रा: हालांकि, उनकी बढ़ती हुई शारीरिक जरूरतों और भूख को देखते हुए अब भोजन की मात्रा बढ़ाकर प्रतिदिन लगभग एक किलो कर दी गई है।
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आसान तरीका: चिकन को बेहद छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खिलाया जाता है, ताकि ये नन्हें बच्चे उसे आसानी से निगल सकें और खा सकें।
🌱 पूरी तरह विकसित होने पर सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़े जाएंगे
वन विभाग की यह योजना कतई नहीं है कि इन उल्लुओं को हमेशा के लिए पिंजरे में कैद या अपने संरक्षण में रखा जाए।
वन अधिकारियों के स्पष्ट निर्देश हैं कि जब ये सभी छह बच्चे शारीरिक रूप से पूरी तरह विकसित हो जाएंगे और स्वतंत्र रूप से आसमान में उड़ने तथा प्राकृतिक जंगल के माहौल में अपना जीवन खुद बिताने में सक्षम हो जाएंगे, तब इन्हें किसी उपयुक्त और सुरक्षित प्राकृतिक आवास (फॉरेस्ट एरिया) में वापस छोड़ दिया जाएगा। फिलहाल वन विभाग की समर्पित टीम इनकी परवरिश और देखरेख में पूरी शिद्दत से जुटी हुई है।