अयोध्या राम मंदिर गबन मामला: SIT जांच शुरू, FIR का इंतजार, बढ़े सवाल
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में 3 सदस्यीय SIT की जांच शुरू। आरोपी अनुकल्प और लवकुश मिश्रा फरार, FIR दर्ज न होने पर उठ रहे बड़े सवाल।
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और जेवरों के गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. सोमवार को मामले की जांच के लिए गठित 3 सदस्यीय SIT टीम अयोध्या धाम पहुंची. गेट नंबर-11 से SIT टीम का काफिला राम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश किया. बीते रविवार को ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने 3 सदस्यीय SIT का गठन किया था, लेकिन कई बड़े सवाल अभी भी उठ रहे हैं. दो अहम किरदार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के आवास पर छापेमारी और पैसों की रिकवरी हुए एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी न तो पुलिस में कोई तहरीर ही दी गई है और न ही इस मामले में FIR ही दर्ज हुई है. लवकुश मिश्रा के परिवार का कहना है कि 10 दिन से बेटा घर नहीं आया तो आखिर किसके हिरासत में है लवकुश मिश्रा और कहां है अनुकल्प मिश्रा?
अनुकल्प मिश्रा के परिवार ने बातचीत से किया इनकार
परिवार के सदस्यों ने यह जानकारी दी कि अनुकल्प घर नहीं आए हैं, वो कहां हैं ये भी नहीं पता. अयोध्या की पॉश कौशलपुरी कॉलोनी में अनुकल्प मिश्रा का आलीशान मकान है, जो उन्होंने कुछ साल पहले ही खरीदा था. आरोप है ये उनके धन वैभव में हुई अप्रत्याशित वृद्धि का नतीजा है, जो अब सवालों के घेरे में है. सूत्र बताते हैं कि बतौर ट्रस्ट कर्मचारी अनुकल्प मिश्रा को 18-20 हजार मासिक वेतन मिलता है, लेकिन उनके खर्चों का अंदाज चर्चा का विषय बने रहते हैं.
लवकुश मिश्रा के घर से 10 लाख रुपए मिले
दूसरा किरदार है लवकुश मिश्रा, जिसके घर से करीब 10 लाख की बरामदगी 5 जून को हुई. ऐसा परिवार वाले ही बता रहे हैं. हैरानी की बात है कि न अब तक कोई FIR सामने आई है और न ही पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि लवकुश उनकी हिरासत में है. सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट की ओर से 10 दिन में कोई तहरीर भी पुलिस को नहीं दी गई है. एक तीसर किरदार राम शंकर यादव ‘टिन्नू’ का इसकी भी मकान और अन्य संपत्तियों चर्चा में हैं. हालांकि अभी तक इस पर कोई आरोप नहीं लगा है.
सपा सांसद ने कहा- जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो
अयोध्या में रविवार का दिन भी राम मंदिर में चढ़ावे के पैसों की हेर-फेर पर आरोप, प्रत्यारोप और बचाव वाले बयानों से भरा रहा. सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे राष्ट्र की सबसे बड़ी लूट बताया और कहा कि उन्हें सरकार की SIT पर भरोसा नहीं है. मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निगरानी में होनी चाहिए.
वहीं अब आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरे भी खुल कर इस मुद्दे को उठा रहे हैं. बाबरी ढांचे को गिराने में मुख्य आरोपी रहे संतोष दुबे ने ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों का नाम ले कर गंभीर आरोप लगाए हैं. संतोष दुबे का कहना है कि ये कोई आज की चोरी नहीं है, बल्कि कई सालों से चोरी होती आ रही है. जो लोग साइकिल से चलते थे, अब लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं. मकान, दुकान और होटल बना रहे हैं. अयोध्या में ट्रस्टी अनिल मिश्रा का मकान चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें लिफ्ट लगवाया जा रहा है. वहीं किसी समय चंपत राय के ड्राइवर रहा टिन्नू यादव अब कई संपत्तियों का मालिक है.
वहीं संतोष दुबे ने कहा कि ईमानदारी का मकान तो हमारा है, जो आज भी वैसे ही है, लेकिन बाकी जो लोग ट्रस्ट से जुड़े हैं, जरा उनके मकान और गाड़ियों की बात करिए. कहां से आया इतना पैसा? जांच करा ली जाए सब पता चल जाएगा. बीजेपी नेता व राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे पूर्व सांसद विनय कटियार ने कहा कि जांच हो रही है, ये गंभीर मामला है. कोई हल्का-फुल्का मामला नहीं है. इस पर बलिदान हुए हैं लोग. हमारे जैसे लोग, कल्याण सिंह जैसे लोग इस पर जेल गए हैं. ये जितने इस समय हैं, सब चोर हैं. इन सबकी छुट्टी करो. गोपाल जी पर सीधे-सीधे आरोप लगाए हैं.
क्या बोले राम मंदिर दर्शन प्रभारी गोपालजी राव?
वहीं राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अब तक पूरे मामले में लग रहे आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण या सवालों के जवाब देते हुए कोई बयान सामने नहीं आया है. रविवार को TV9 डिजिटल ने जब ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य और राम मंदिर दर्शन प्रभारी गोपालजी राव से बातचीत की तो उन्होंने केवल सरकार का धन्यवाद करते हुए इतना कहा कि कम समय में संज्ञान लेते हुए SIT का गठन किया और ट्रस्ट पूरा सहयोग करेगा. वहीं प्रकरण पर केवल इतना कहा कि गणना करने वाले ऑडिट कर रहे थे तो कुछ भ्रम हुआ था, जिसे दूर करने के लिए SIT जांच का निवेदन किया गया. जहां एक ओर रेड और रिकवरी चल रही है, लोग पकड़े उठाये जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट अब तक भ्रम में ही होने की बात कह रहा है.
अयोध्या में दान राशि गबन के आरोपों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है. अब राम नगरी में इस पर पोस्टर लगाने की शुरुआत भी हो गई है. सोमवार सुबह अयोध्या में यूथ कांग्रेस नेता द्वारा एक पोस्टर लगवाया गया, जिसमें स्कंद पुराण के दोहे के साथ मंदिर को दी गई भूमि, संपत्ति या दान धन चुराने और हड़पने को महापाप बताया गया है.
अयोध्या में हैं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र
इस बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी अयोध्या में ही मौजूद हैं. SIT गठन पर एक बार फिर बड़ी जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आज SIT यहां जांच करने पहुंची है. किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. पूरे मामले के दो पहलू हैं- आपराधिक और भविष्य में सुधार. आने वाले समय में ये सब होने के बाद ही जनता का विश्वास हासिल कर पाएगा ट्रस्ट? नृपेंद्र मिश्र के बयान से स्पष्ट है कि मामले में दंड और सुधार दोनों कार्रवाई होगी. मतलब आने वाले समय में ट्रस्ट के दान गणना और हिसाब-किताब से जुड़ी कार्यप्रणाली में बदलाव भी देखने को मिलेगा.
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी रविवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे प्रकरण पर विहिप की राय रखी. उन्होंने कहा कि मामले में विहिप ने जानकारी ली है. पहले जो प्रणाली बनाई गई थी, वो विशेषज्ञों से राय लेकर की गई थी, लेकिन अब संदेह को दूर किया जाएगा. SIT को जांच में सहयोग देगा ट्रस्ट, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी. मामले के तह तक पहुंचा जाएगा.
अब बात करते हैं व्यवस्था की. आखिर किस तरह से कैश दान और काऊंटर पर मिले दान को एकत्रित किया जाता है और बैंक को भेजा जाता है? ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी और जिन्होंने लंबे समय तक इसकी जिम्मेदारी संभाली उन प्रकाश गुप्ता ने पूरी प्रक्रिया को बताया. साथ ही यह भी कहा कि पहले जब गड़बड़ी का पता चला था, उस समय यदि ठोस कार्रवाई हो जाती तो आज ऐसा प्रकरण सामने नहीं आता.