एक्सप्रेस-वे की सड़क धंसने पर NHAI सख्त, कई अधिकारी हटाए गए, IIT खड़गपुर करेगी जांच
4200 करोड़ रुपये के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे में खामियों के बाद NHAI ने PNC इंफ्राटेक पर कार्रवाई की। अधिकारियों को हटाया गया और टोल वसूली रोक दी गई है।
करीब 4,200 करोड़ रुपए की लागत से बने लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई तकनीकी खामियों के मामले में NHAI ने बड़ी कार्रवाई की है. 13 जुलाई 2026 को शुरू हुए इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में बार-बार सड़क की सतह और ब्रिज अप्रोच में खराबी आने के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं. NHAI ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी और कहा कि तकनीकी जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है.
पहली बार 26 जुलाई को सामने आई थी समस्या
एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के करीब 12-13 दिन बाद, 26-27 जुलाई को उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में सड़क की ऊपरी परत (वियरिंग कोट) लगभग 40 मीटर तक खिसक गई थी. उस समय NHAI ने इसे सड़क धंसना नहीं बल्कि केवल सतह का स्लिपेज बताया था. तत्काल मरम्मत कर यातायात बहाल कर दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसी क्षेत्र में फिर से सड़क की सतह प्रभावित हो गई.
दूसरी बार खराबी आने पर केवल पैचवर्क करने के बजाय करीब 220 मीटर लंबे ब्रिज अप्रोच सेक्शन को दोबारा बनाने का फैसला लिया गया. इस दौरान ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा. बाद में एक्सप्रेस-वे के कई हिस्सों पर पैचवर्क और मरम्मत की तस्वीरें भी सामने आईं, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे.
NHAI ने निर्माण कंपनी पर लिया बड़ा एक्शन
लगातार सामने आ रही खामियों के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा भविष्य में NHAI की परियोजनाओं की निविदाओं में भाग लेने पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है. NHAI ने कंपनी पर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा है. साथ ही कंपनी की पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स (PCI) रेटिंग डाउनग्रेड करने की तैयारी की जा रही है.
मरम्मत का पूरा खर्च कंपनी उठाएगी
NHAI ने स्पष्ट किया कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत पर लगभग 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इसका पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक लिमिटेड अपने स्तर पर वहन करेगी. इस कार्य में NHAI पर किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं आएगा. जब तक मरम्मत पूरी तरह संतोषजनक तरीके से पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित हिस्से पर टोल वसूली भी बंद रहेगी.
कई अधिकारियों पर भी गिरी गाज
इस मामले में परियोजना से जुड़े कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है. प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया है. इन अधिकारियों को अगले दो वर्षों तक NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और NHIDCL की परियोजनाओं में काम करने से भी प्रतिबंधित किया गया है.
इसके अलावा वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है. पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया और नकुल प्रकाश वर्मा के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. वहीं स्वतंत्र इंजीनियरिंग एजेंसी थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज के खिलाफ भी डिबारमेंट नोटिस जारी किया गया है.
IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच
NHAI ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम को जिम्मेदारी सौंपी है. यह टीम सड़क धंसने और स्लिपेज की वास्तविक वजह का पता लगाएगी. साथ ही पूरे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से पेवमेंट गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो.
NHAI ने क्या कहा?
NHAI के मुख्य महाप्रबंधक (टेक्निकल) एवं क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत निर्माण कंपनी अपने खर्च पर करेगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
सांसद साक्षी महाराज के बयान पर भी हुई चर्चा
एक्सप्रेस-वे में लगातार सामने आ रही खराबी के बीच सांसद साक्षी महाराज का बयान भी चर्चा में रहा. उन्होंने कहा था कि “सड़क पर चलने के बाद ही पता चलता है कि कहां-कहां कमी है. नया घर बनने पर भी कई बार ऐसी छोटी-मोटी दिक्कतें सामने आती हैं.”
हालांकि अब NHAI ने स्वयं निर्माण में हुई खामियों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. निर्माण कंपनी पर कार्रवाई, अधिकारियों को हटाने, तकनीकी जांच और टोल वसूली रोकने जैसे फैसले यह संकेत देते हैं कि परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.