कालाष्टमी 2026: अधिकमास में काल भैरव पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
आज कालाष्टमी पर काल भैरव की विशेष पूजा है। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और काल भैरव देव की उपासना का विशेष महत्व।
आज ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, इसलिए आज कालाष्टमी का व्रत रखा जा रहा है. कालाष्टमी का व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव जी को समर्पित किया गया है. इस दिन व्रत के साथ-साथ काल भैरव देव जी की विशेष पूजा-अराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन व्रत और पूजन करने से काल भैरव देव प्रसन्न होते हैं और जीवन के सारे संकट और शत्रुओं से मुक्ति दिलाते हैं.
भगवान के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. आज अधिकमास की कालाष्टमी का व्रत है. ये व्रत तीन सालों में एक बार पड़ता है, इसलिए इस व्रत का विशेष महत्व है. कालाष्टमी पर काल भैरव देव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं आज काल भैरव देव जी की पूजा का शुभ मुहूर्त.
कालाष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त (Adhik Maas Kalashtami 2026 Puja Subh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल की शुरुआत 6 बजकर 30 मिनट पर होगी, जो शाम 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. ऐसे में आज भक्तों को काल भैरव देव जी की पूजा के लिए 01 घंटे का समय मिलेगा.
कालाष्टमी की पूजा विधि (Adhik Maas Kalashtami Puja Vidhi)
- कालाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें.
- प्रदोष काल में विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करें.
- पूजा के समय भगवान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
- भगवान को पुष्प चढ़ाएं और तिलक लगाएं.
- काल भैरव को सरसों का तेल, काले तिल, नारियल, लड्डू और मीठा पान अर्पित करें.
- शराब, इमरती और जलेबी, काले चने, दही-बड़ा, हलवा, खीर, गुलगुले और मदिरा का भोग अर्पित करें.
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- भैरव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप करें.
कालाष्टमी के व्रत का महत्व (Kalashtami Vrat Significance)
कालाष्टमी का दिन काल भैरव देव की कृपा पाने का विशेष अवसर होता है. इस दिन भैरव देव की अराधना सबसे अच्छी मानी जाती है. इस पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से रोग, दोष और भय से छुटकारा मिल जाता है. शास्त्रों के अनुसार, काल भैरव देव न्याय, समय और सुरक्षा के देवता हैं. भैरव देव की पूजा करने से जीवन में अनुशासन आता है और आत्मविश्वास बढ़ता है. इस दिन किया गया दान भी बहुत शुभ फल देता है.