कुनाल शाह बने WhatsApp के ग्लोबल हेड: मेटा और CRED की हुई मेगा डील

CRED फाउंडर कुनाल शाह बने WhatsApp के नए ग्लोबल हेड। मेटा ने CRED में किया 900 मिलियन डॉलर का निवेश। जानें कुनाल शाह का अब तक का सफर और मेटा का पूरा प्लान।

कुनाल शाह के व्हाट्सऐप का ग्लोबल हेड बनने के साथ दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों की अगुवाई करने वाले भारतीय मूल के कार्यकारियों की सूची में एक और नाम जुड़ गया है. फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी (फिनटेक) प्लेटफॉर्म क्रेड के फाउंडर शाह, मेटा की ग्लोबल लीडरशिप टीम में शामिल होकर इस बड़ी टेक कंपनी के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को संभालेंगे. शाह के व्हाट्सऐप से जुड़ने के साथ एक और नाम भारतीय परिवेश से निकलकर सिलिकॉन वैली के शीर्ष स्तर तक पहुंचने वालों की सूची में शामिल हो गया है.

इस बदलाव के साथ शाह उन खास पेशेवरों के समूह में शामिल हो गए हैं जो अरबों उपयोगकर्ता और खरबों डॉलर के बाजार मूल्यांकन वाले मंचों को संभालते हैं. इससे यह बात फिर साबित होती है कि ग्लोबल डिजिटल सर्विस की अगुवाई करने के लिए जरूरी रणनीतिक सोच के लिए भारतीय प्रतिभा की मांग बढ़ रही है. आइए आपको कुनाल शाह और क्रेड और मेटा की मेगा डील को लेकर विस्तार से जनकारी देते हैं….

कौन है कुनाल शाह?

फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म CRED के फ़ाउंडर और एंटरप्रेन्योर कुनाल शाह को WhatsApp का ग्लोबल हेड बनाया गया है. यह नियुक्ति Meta द्वारा उनके फिनटेक वेंचर में बड़े निवेश की घोषणा के बाद हुई है. इस नियुक्ति के साथ ही, शाह इस ग्लोबल मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के पहले भारतीय चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव बन गए हैं. शाह, विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जो 2019 से WhatsApp को लीड कर रहे थे. कैथकार्ट Meta के अंदर ही बनाए गए एक नए डिवीजन में चले जाएंगे, जिसका काम बिल्कुल नए सिरे से अगली पीढ़ी के प्रोडक्ट्स बनाना होगा. शाह बेंगलुरु से कैलिफ़ोर्निया के मेनलो पार्क में स्थित Meta के हेडक्वार्टर चले जाएंगे. मिटेन संपत, जो 2020 से CRED में स्ट्रैटेजी और फ़ाइनेंस का काम संभाल रहे थे, तुरंत प्रभाव से अंतरिम चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर का पद संभालेंगे.

42 साल के एंटरप्रेन्योर ने कहा कि वह CRED में अपनी ऑपरेटिंग जिम्मेदारियों से हट जाएंगे. उन्होंने 2018 में इस फिनटेक कंपनी की शुरुआत की थी, हालांकि वह शेयरहोल्डर के तौर पर कंपनी से जुड़े रहेंगे. X पर एक पोस्ट में शाह ने कहा कि हालांकि इसने काफी तरक्की की है, लेकिन आज के WhatsApp और इसकी पूरी क्षमता के बीच अभी भी बहुत बड़ा अंतर है. मैं WhatsApp के सफर के अगले चरण के लिए मार्क, क्रिस और मेटा की लीडरशिप के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हूं. विल, दुनिया जिस चीज पर चुपचाप भरोसा करती है, उसे इतना बड़ा बनाने और इस बदलाव को आसान बनाने के लिए आपका धन्यवाद.

यह घोषणा मेटा प्लेटफॉर्म्स के CRED में 900 मिलियन डॉलर का निवेश करने के फैसले के साथ आई है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस निवेश से मेटा को फिनटेक कंपनी में 20 प्रतिशत की माइनॉरिटी हिस्सेदारी मिलेगी, जिससे पोस्ट-मनी आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन 4.5 बिलियन डॉलर (लगभग 43,239 करोड़ रुपए) हो जाएगी.

फिलॉसफी के स्टूडेंट से स्टार्टअप फ़ाउंडर तक

अहमदाबाद में जन्मे और मुंबई में पले-बढ़े शाह ने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी की पढ़ाई की. बाद में उन्होंने MBA प्रोग्राम में दाखिला लिया, लेकिन उसे पूरा करने से पहले ही छोड़ दिया. उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप में बड़ी सफलता 2010 में मिली, जब उन्होंने संदीप टंडन के साथ मिलकर FreeCharge की शुरुआत की. यह प्लेटफ़ॉर्म यूज़र्स को मोबाइल फ़ोन रिचार्ज करने और यूटिलिटी बिल भरने के साथ-साथ रिवॉर्ड्स कमाने की सुविधा देता था. जैसे-जैसे भारत में स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल और डिजिटल पेमेंट बढ़े, FreeCharge देश के सबसे जाने-माने इंटरनेट ब्रांड्स में से एक बन गया. 2015 में, ई-कॉमर्स कंपनी Snapdeal ने लगभग $400 मिलियन की डील में FreeCharge को खरीद लिया.

FreeCharge के बाद CRED बनाना

FreeCharge से बाहर निकलने के बाद, शाह ने कई सालों तक एंजेल इन्वेस्टर के तौर पर काम किया और दर्जनों टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को सपोर्ट किया. 2018 में, उन्होंने CRED लॉन्च करके एंटरप्रेन्योरशिप में वापसी की. यह प्लेटफ़ॉर्म शुरू में क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरने वाले यूज़र्स को रिवॉर्ड देने के लिए बनाया गया था. कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफ़ॉर्म अब लाखों यूज़र्स को सेवा देता है और भारत में क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट का एक बड़ा हिस्सा प्रोसेस करता है.

शाह की लीडरशिप में CRED तेज़ी से आगे बढ़ा. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 और 2025 के बीच इस प्लेटफ़ॉर्म के मेंबर्स की संख्या बढ़कर 1.7 करोड़ (17 मिलियन) हो गई और इसने पेमेंट, लेंडिंग, इंश्योरेंस, कॉमर्स, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सर्विसेज़ जैसे क्षेत्रों में अपना विस्तार किया. कंपनी ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स से 900 मिलियन डॉलर से ज़्यादा फ़ंड जुटाया, कई बार एम्प्लॉई स्टॉक ओनरशिप प्लान (ESOP) बायबैक पूरे किए और 2026 में अपना पहला मुनाफे वाला क्वार्टर दर्ज किया.

इन्वेस्टर, मेंटर और इंडस्ट्री लीडर

कंपनियां शुरू करने के अलावा, शाह ने भारत के सबसे एक्टिव एंजेल इन्वेस्टर्स में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने फ़िनटेक, एजुकेशन, मोबिलिटी, गेमिंग और ई-कॉमर्स जैसे कई क्षेत्रों में सफल स्टार्टअप्स को सपोर्ट किया है. उन्होंने ‘इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया’ जैसे संगठनों में लीडरशिप और एडवाइज़री भूमिकाएं निभाई हैं, ‘Y Combinator’ में पार्ट-टाइम पार्टनर के तौर पर काम किया है और ‘Pine Labs’ में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया है.

मेटा ने शाह को क्यों चुना?

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर क्रिस कॉक्स ने शाह को “भारत के सबसे सम्मानित उद्यमियों में से एक” बताया. कर्मचारियों को भेजे एक इंटरनल मैसेज में इस लीडरशिप फैसले के बारे में बताते हुए कॉक्स ने कहा कि जब कैथकार्ट ने पद छोड़ने की इच्छा जताई, तो मेटा ने ऐसे लीडर की तलाश शुरू की जिसे WhatsApp के ग्लोबल प्रोडक्ट के मौकों की “सहज समझ” हो, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आने वाले बदलावों को संभालने की क्षमता हो, और दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म को चलाने के लिए ज़रूरी लीडरशिप स्किल्स हों. कॉक्स ने कहा, “कुनाल स्पष्ट पसंद बनकर उभरे.”

दुनिया की बड़ी कंपनियों के टॉप है भारतीय

उल्लेखनीय है कि 2026 की शुरुआत में, भारतीय मूल की आशा शर्मा को माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग का सीईओ बनाया गया. उन्होंने फिल स्पेंसर की जगह ली थी. पिछले साल अक्टूबर में, राहुल पाटिल एआई कंपनी एंथ्रोपिक में मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी के तौर पर शामिल हुए. ये हाल की नियुक्तियां 2023 में नील मोहन के यूट्यूब के सीईओ और रवि कुमार एस के कॉग्निजेंट के सीईओ बनने के बाद हुई हैं. शीर्ष स्तर पर पहुंचने के इस उभार की नींव सत्य नडेला और सुंदर पिचाई जैसी मशहूर हस्तियों ने रखी थी.

नडेला 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने. उन्हें क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई पर जोर देकर कंपनी की स्थिति को बेहतर बनाने का श्रेय दिया जाता है. सुंदर पिचाई ने 2015 में गूगल और बाद में 2019 में इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट की कमान संभाली. इस सूची में शांतनु नारायण जैसे लंबे समय से नेतृत्व कर रहे लोग भी शामिल हैं. उन्होंने 2007 से एडोब की अगुवाई की. आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा भी इस सूची में शामिल हैं जिन्होंने अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी में अपने 35 साल के करियर के दौरान कई बड़े बदलाव किए हैं.

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