गाजियाबाद में स्क्रब टाइफस के 3 नए मामले आने से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
गाजियाबाद में स्क्रब टाइफस के तीन नए मामले दर्ज। स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट, जानें लक्षण और बचाव।
गाजियाबाद में स्क्रब टाइफस ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। शहर में स्क्रब टाइफस के तीन नए मामले सामने आए हैं। हेल्थ अथॉरिटीज ने गाजियाबाद में ताजा अलर्ट जारी किया है। तीन नए मामले ग्रामीण पटला (मुरादनगर), अनिल विहार और खोड़ा कॉलोनी से सामने आए हैं। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
मॉनसून के वजह से जगह-जगह इकट्ठा हुए पानी और हरियाली से वेक्टर कीटों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। यह कीड़ा घास, पौधों या ज्यादा नमी वाले स्थानों पर होता है इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश में पब्लिक हेल्थ यूनिट्स ने रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तैनात की हैं।
यह बीमारी एक तरह के कीड़े के काटने से होती है। संक्रमण ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के वजह से होता है। समय से इलाज न मिलने पर मरीज की मौत तक हो जाती है। इस बीमारी का संक्रमण मरीज के शरीर के सभी अंगों को खराब कर देता है।
कुछ-कुछ चिकनगुनिया जैसे लक्षण
यह बीमारी डेंगू और स्वाइन फ्लू से भी घातक है। स्क्रब टाइफस के लक्षण कुछ-कुछ चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं। लक्षण पाए जाने पर जल्द से जल्द डॉक्टर की परामर्श लेनी चाहिए, जिससे सही समय पर इलाज शुरू कर जान बचाई जा सके।
ऐसे करें बचाव
बुखार तीन-चार दिनों से ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। पार्क या पेड़-पौधों के बीच जाने से पहले पूरी बाजू के कपड़े पहनें। घर के अंदर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें। इस बीमारी से बचने के लिए आसपास के क्षेत्र, घर और अपने शरीर की साफ-सफाई का ध्यान दें। यह बीमारी चूहों में एक कीड़ा होता है, जिससे फैलती है, इसलिए घर में जितना हो सके चूहों के प्रवेश होने पर रोक लगाएं।
ये हैं लक्षण
लक्षण की बात करें तो मरीज को पीलिया की शिकायत, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, जी मचलाना, जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार, गर्दन में दर्द और शरीर के जिस हिस्से में कीड़े ने काटा होता है वहां पर लाल रंग का निशान हो जाता है। ऐसे में इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। इसके अलावा एक्सपर्ट्स लगातार पांच दिन या उससे ज्यादा समय तक बुखार रहने की स्थिति को सामान्य बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करने और चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी है। बीमारी की समय पर पहचान होने से मरीजों को गंभीर स्थिति में जाने से बचाने में मदद मिलती है।