डिमेंशिया में योग के लाभ: पीजीआई चंडीगढ़ की कार्यशाला में अहम जानकारी

पीजीआई चंडीगढ़ में आयोजित कार्यशाला में डिमेंशिया और योग के संबंधों पर चर्चा हुई। जानें कैसे नियमित प्राणायाम और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।

चंडीगढ़: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले पीजीआई चंडीगढ़ में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में योग, बढ़ती उम्र और डिमेंशिया जैसी भूलने की बीमारी पर विस्तार से चर्चा की गई. कार्यक्रम में डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया.

‘डिमेंशिया केवल भूलने की बीमारी नहीं है’: कार्यशाला में डॉक्टरों ने बताया कि “डिमेंशिया केवल भूलने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सोचने, समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है. इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.”

सांस संबंधी अभ्यास और ध्यान डिमेंशिया मरीजों के लिए लाभकारीः कार्यशाला में बताया कि “नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. भले ही डिमेंशिया से जूझ रहे सभी मरीज कठिन योगासन न कर पाएं, लेकिन सांस संबंधी अभ्यास और ध्यान उनके लिए लाभकारी हो सकते हैं.”

एनसीडी वर्ल्ड फेडरेशन की ओर से कार्यशाला का हुआ आयोजनः पीजीआई के योग केंद्र और एनसीडी वर्ल्ड फेडरेशन की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि “बढ़ती उम्र के साथ डिमेंशिया के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय पर बीमारी की पहचान, सही देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित हो सकती है.”

मानसिक संतुलन के लिए योग जरूरीः कार्यक्रम के दौरान पीजीआई के योगा रिसर्च सेंटर के हेड डॉक्टर अक्षय आनंद ने कहा कि “योग सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति से भी जुड़ा है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को अपने लिए भी समय निकालना चाहिए.”

मरीजों के साथ संवेदनशीलता से पेश आना बेहद जरूरी: पीजीआई की न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुचरिता रे ने कहा कि “बीमारी की जल्दी पहचान होने पर मरीज और उसके परिवार को बेहतर मदद मिल सकती है. उन्होंने देखभाल करने वालों को सलाह दी कि डिमेंशिया मरीजों के साथ धैर्य और संवेदनशीलता से पेश आना बेहद जरूरी है.”

गुड योगा प्रैक्टिसेज पुस्तक में योग की प्रमाणिक जानकारीः डॉ. अक्षय आनंद ने कहा कि इस दौरान गुड योगा प्रैक्टिसेज नामक पुस्तक में योग की विभिन्न तकनीकों और उनके वैज्ञानिक उपयोगों को सरल तरीके से समझाया गया है. बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है. ऐसे कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने और बीमारी को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने में अहम भूमिका निभाते हैं.”

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