दिल्ली के ग्राउंडवाटर में यूरेनियम की चिंता, NGT का दिल्ली सरकार को नोटिस

दिल्ली के भूजल में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से अधिक! NGT ने दिल्ली सरकार और DPCC को किया तलब। जानें क्या है पूरा मामला और क्या कहता है नया डेटा।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने दिल्ली के ग्राउंडवाटर में यूरेनियम की मात्रा को लेकर आई एक रिपोर्ट पर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने मामले में सुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और दिल्ली सरकार को प्रतिवादी के तौर पर शामिल करने का निर्देश दिया है। दरअसल, एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दिल्ली में 13 से 15 प्रतिशत ग्राउंडवाटर सैंपल में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई थी।

एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद की बेंच ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वे नए जोड़े गए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें। ट्रिब्यूनल ने आदेश में कहा है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को उसके मेंबर सेक्रेटरी के माध्यम से जबकि दिल्ली सरकार उसके प्रधान सचिव पर्यावरण के माध्यम से नोटिस जारी किए जाएं।

ट्रिब्यूनल ने अपने कार्यालय को 28 नवंबर, 2025 की ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर रखने का भी निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की ‘वार्षिक ग्राउंड वॉटर क्वालिटी रिपोर्ट 2025’ के निष्कर्षों का हवाला दिया गया था। सुनवाई के दौरान, सेंट्रल ग्राउंड वॉटर कमीशन के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए 6 हफ्ते का समय मांगा और बताया कि जवाब पर मंत्रालय में विचार किया जा रहा है।

ग्राउंड वॉटर पलूशन से संबंधित रिपोर्ट पर उत्तर-पश्चिमी भारत को भू-वैज्ञानिक कारणों, भूजल में कमी और एक्विफर की विशेषताओं के कारण यूरेनियम प्रदूषण के ‘हॉटस्पॉट’ के तौर पर पहचाना गया। उत्तर-पश्चिमी भारत के संबंधित राज्यों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से शामिल हैं। एनजीटी ने दिल्ली के भूजल में फ्लोराइड और नाइट्रेट के पलूशन का भी जिक्र किया।

अपडेट जारी….

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