दिल्ली में चलेगी 7-सीटर इलेक्ट्रिक वैन, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी होगी बेहतर

दिल्ली सरकार तंग गलियों और इलाकों के लिए 7-सीटर इलेक्ट्रिक वैन सेवा शुरू करेगी। 'ग्रामीण सेवा' की तर्ज पर मिलेगी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी। जानें पूरी खबर।

दिल्ली सरकार ‘ग्रामीण सेवा’ नेटवर्क की तर्ज पर सात-सीटर इलेक्ट्रिक वैन चलाने की योजना पर विचार कर रही है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि इसका मकसद उन इलाकों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (आखिरी पड़ाव तक पहुंचने की सुविधा) को बेहतर बनाना है, जहां आम बसें नहीं चल सकतीं। जानकारी के मुताबिक, यह योजना अभी शुरुआती चरण में है। सरकार इच्छुक ऑपरेटर्स और इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को इस मकसद के लिए सही वाहनों के मेकिंग और मॉडल का सुझाव देने के लिए आमंत्रित करेगी।

एक अधिकारी ने बताया कि हम ‘ग्रामीण सेवा’ जैसा ही ईवी आधारित शेयर्ड मोबिलिटी मॉडल लाने पर विचार कर रहे हैं ताकि लास्ट-माइल कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। इसका मकसद ऐसे छोटे इलेक्ट्रिक वाहन लाना है जो तंग गलियों में आसानी से चल सकें और किफायती ट्रांसपोर्ट की सुविधा दे सकें। अभी इन वाहनों की खूबियां तय नहीं हुई हैं।

अधिकारी ने कहा कि इन वाहनों को सरकार या सरकार से मान्यता प्राप्त प्राइवेट ऑपरेटर चला सकते हैं। प्रस्तावित वाहन मौजूदा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस के मुकाबले कम किराए पर चलेंगे और ये पॉइंट-टू-पॉइंट टैक्सी के बजाय कई पिक-एंड-ड्रॉप पॉइंट वाली फीडर सर्विस के तौर पर काम करेंगे। इस सर्विस का मकसद रिहायशी इलाकों, मेट्रो स्टेशनों और मुख्य बस रूटों के बीच कनेक्टिविटी की कमी को दूर करना है। खासकर अनधिकृत कॉलोनियों, गांवों और तंग सड़कों वाले घनी आबादी वाले इलाकों में।

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) के इंडिया हेड अमित भट्ट ने कहा कि पैरा-ट्रांसिट का इलेक्ट्रिफिकेशन एक अहम कदम है क्योंकि ये सर्विस शहरी आवाजाही में बड़ी भूमिका निभाती हैं। ये उन इलाकों में आखिरी कनेक्टिविटी देती हैं जहां आम बसें ठीक से नहीं चल पातीं। सात सीटों वाली इलेक्ट्रिक वैन लाने से किफायती ट्रांसपोर्ट के साथ ही प्रदूषण भी कम हो सकता है।

अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शा की संख्या पर भी लगाम लगने की उम्मीद है। इसके लिए एक व्यवस्थित परमिट-आधारित फीडर सर्विस शुरू की जाएगी ताकि ई-रिक्शा की संख्या को रेगुलेट और सीमित किया जा सके। हालांकि, इस स्कीम को शुरू करने से पहले कमर्शियल गाड़ियों के मौजूदा परमिट नियमों में बदलाव करने होंगे।

यह प्रस्ताव लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की सरकार की बड़ी कोशिशों का ही एक हिस्सा है। दिल्ली सरकार अपनी इलेक्ट्रिक फीडर बसों की संख्या बढ़ा रही है और भीड़-भाड़ वाले इलाकों के लिए छोटी, सात-मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें लाने का प्रस्ताव भी दिया है। यह सरकार की हाल ही में जारी ईवी पॉलिसी 2026 के भी अनुरूप है, जिसका मकसद पब्लिक और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव को तेजी से आगे बढ़ाना है।

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