दिल्ली टोल नाके: जाम से बेहाल जनता, निगम की सुस्त तकनीक बनी मुसीबत

दिल्ली के टोल नाकों पर मैनुअल वसूली और तकनीकी खामियों के कारण घंटों का जाम। गाजीपुर से डीएनडी तक का हाल। जानें क्यों डिजिटल इंडिया में भी टोल पर रुकना है मजबूरी।

क्या आप भी रोज दिल्ली की सीमाओं पर घंटों रेंगते हैं? दफ्तर के लिए लेट होते हैं या स्कूल-कॉलेज पहुंचने में देरी होती है? आपका यह कीमती वक्त ट्रैफिक जाम से ज्यादा निगम की आधी-अधूरी और सुस्त तकनीक की वजह से बर्बाद हो रहा है। डिजिटल इंडिया के दौर में आज भी दिल्ली की सीमाओं पर मैनुअल तरीके से टोल वसूला जा रहा है, जो लाखों लोगों के लिए सिरदर्द बन चुका है। पेश है ‘हिन्दुस्तान’ की इस खास ग्राउंड रिपोर्ट में दिल्ली के टोल नाकों की पहली कड़ी:

गाजीपुर बॉर्डर : ऐप पर निर्भरता और कैमरे फेल होने से थम जाता है ट्रैफिक

एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर यूपी गेट तक वाहनों की लंबी कतार रही और गाड़ियां रेंगती नजर आईं। यहां फल-सब्जी की गाड़ियों, बसों और कैब जैसे कमर्शियल वाहनों को टोल देने के लिए अनिवार्य रूप से रुकना पड़ता है। वजह आरएफआईडी स्टिकर को स्कैन करने वाले कैमरे काम नहीं कर रहे थे। टोल कर्मी ऐप पर मैनुअली गाड़ी का नंबर दर्ज करता है, जिसके बाद शुल्क कटता है। इस प्रक्रिया में प्रति वाहन 30 से 40 सेकेंड बर्बाद हो रहे हैं। पास वैधता जांचने का कोई आधुनिक सिस्टम नहीं है। रात में ‘नो एंट्री’ खुलने के बाद भी यही स्थिति बनती है।

डीएनडी फ्लाईवे : तीनों लेन ब्लॉक कर टोल वसूली

नोएडा और पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली को जोड़ने वाले डीएनडी फ्लाईवे पर सुबह करीब आधा किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। कमर्शियल वाहनों के लिए एक समर्पित लेन के बावजूद टोल कर्मचारी तीनों लेन घेरकर खड़े हो जाते हैं। यहां भी गाजीपुर की तरह ऐप पर नंबर दर्ज कर और नकद टोल लिया जा रहा है।

रजोकरी बॉर्डर : टोल लाइन में फंसे आम वाहन चालक

गुरुग्राम से आने वाले द्वारका एक्सप्रेसवे और एनएच-48 के इस मिलन पॉइंट पर सुबह पीक ऑवर्स के दौरान वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में टोल नाके पर कमर्शियल गाड़ियों को रोकने से पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सभी लेन पर मिक्स टोल वसूली होती है, जिससे आम वाहन चालक बेवजह फंसे रहते हैं।

कालिंदी कुंज रोड : अव्यवस्था के चलते एक किलोमीटर लंबा जाम

नोएडा और ग्रेटर नोएडा से ओखला, फरीदाबाद और सरिता विहार जाने वाला यह मार्ग पहले से ही संकरा है, उस पर निगम के टोल बूथ ने संकट को और बढ़ा दिया है। यहां लगभग एक किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी रही। टोल के लिए निर्धारित एक लेन के बजाय कर्मचारी बीच सड़क पर खड़े होकर बाकी लेन से भी मैनुअल वसूली कर रहे हैं। मौके पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों का न होना इस अव्यवस्था को और गंभीर बना देता है।

यह भी समस्या

नगर निगम के टोल वसूलने में कर्मचारियों द्वारा सड़कों पर अव्यवस्था की वजह से आम लोग जाम का झाम झेलते हैं। कई तकनीकी खामियां भी समस्या की वजह बनती हैं।

मासिक पास बनवाने वाले भी लगाते जाम

हर टोल नाके पर मासिक पास बनवाने वालों के कारण भी जाम लगता है। कमर्शियल वाहन चालक इस पास को बनवाने के लिए सड़क किनारे की लेन पर वाहन को खड़ा कर देते हैं। कई-कई वाहन एक साथ खड़े होने के कारण एक लेन बाधित हो जाती है। लेन बदलने से दूसरी पर जाम लगने लगता है।

प्रवेश माही, मेयर, दिल्ली, ”निगम के टोल नाकों में बैरियर रहित मल्टी लेन बिना रुकावट (एमएलएफएस) प्रणाली लगाई जाएगी। इसे आरएफआईडी और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान के साथ एकीकृत करेंगे। नई तकनीक को अपनाते हुए मल्टी लेन सुविधा विकसित की जाएगी।”

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