दिल्ली पुलिस का बड़ा सुधार: जांच और कानून-व्यवस्था का काम होगा अलग

दिल्ली पुलिस ने जांच की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। अब जांच अधिकारी कानून-व्यवस्था के बजाय सिर्फ आपराधिक मामलों पर फोकस करेंगे।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने सभी जिला यूनिट्स को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मुकदमों की जांच के कामों को सख्ती से अलग रखने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आपराधिक जांच के काम में तेजी लाने के मकसद से उन्हें जिला जांच इकाइयों (DIUs) को मजबूत करने का निर्देश दिया गया है।

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, कमिश्नर ने शनिवार को हुई एक समीक्षा बैठक में सभी जिलों के डीसीपी से पायलट मॉडल के लिए हर जिले से एक-एक थाना चुनने को कहा है। थानों का यह चुनाव अपराध की संख्या, एफआईआर दर्ज होने की संख्या, शिकायतें, पीसीआर कॉल और कानून-व्यवस्था की जरूरतों जैसे पैमानों के आधार पर किया जाएगा।

पुलिसिंग में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इसे सही ढंग से लागू करने से थाना स्तर पर पुलिसिंग में बड़ा बदलाव आ सकता है। ऐसा होने से जांच अधिकारी पूरी तरह से आपराधिक मामलों पर फोकस कर सकेंगे, जबकि अलग-अलग टीमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालेंगी।

एक अधिकारी ने कहा कि इसे सबसे पहले हर जिले के एक थाने में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा और इसके नतीजे पुलिस कमिश्नर के साथ शेयर किए जाएंगे।

पहले भी की गई थी ऐसी कोशिश

यह कदम दिल्ली पुलिस द्वारा 2018 में शुरू किए गए सुधारों को फिर से लागू करने जैसा है, जो प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू किए गए थे। इन निर्देशों में प्रोफेशनल और टाइम बाउंड जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच के काम को रोजमर्रा की पुलिसिंग से अलग करने को जरूरी बताया गया था। हालांकि, वो कोशिश कुछ ही महीनों में बंद कर दी गई थी।

नए आदेशों के तहत जिलों को जांच टीमों, बीट स्टाफ, कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मियों और प्रशासनिक स्टाफ की संख्या का आकलन करना होगा, जिनमें डैशबोर्ड और स्टैटिक ड्यूटी वाले लोग भी शामिल होंगे। खास बात यह है कि सीनियर अधिकारियों की ज़ुबानी या लिखित मंजूरी के बिना जांच स्टाफ को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के काम में नहीं लगाया जा सकता।

जांच की गुणवत्ता बढ़ाने में मिलेगी मदद

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जांच अधिकारी अपने मामलों पर ध्यान केंद्रित रखें और उन्हें वीआईपी ड्यूटी या अन्य कामों में बार-बार न लगाया जाए। जांच की बेहतर गुणवत्ता से सीधे तौर पर कनविक्शन रेट और जनता का भरोसा बढ़ता है।

जटिल मामले जल्दी और प्रोफेशनल तरीके से सुलझ सकेंगे

जॉइंट पुलिस कमिश्नर मधुर वर्मा ने कहा कि अपराध का बदलता स्वरूप विशेष जांच को और भी जरूरी बनाता है। उन्होंने कहा कि फाइनेंशियल फ्रॉड, ऑर्गनाइज्ड चीटिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े अपराधों की जांच के लिए खास जानकारी और अनुभव रखने वाले जांचकर्ताओं की जरूरत होती है। DIU को मजबूत करने और जांचकर्ताओं को कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे रोजमर्रा के कामों से अलग रखने से जांच की क्वालिटी बेहतर होगी और जटिल मामलों को अधिक प्रोफेशनल तरीके से सुलझाया जा सकेगा।

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