दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर समय के हिसाब से बदलेगी रफ्तार, जानें क्या है नया नियम

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जाम और हादसों को रोकने के लिए समय के आधार पर गति सीमा (Variable Speed Limit) तय करने का अध्ययन 15 अगस्त से शुरू होगा।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर समय के हिसाब से वाहनों की रफ्तार तय की जाएगी। अब तक सड़कों पर वाहनों के लिए गति सीमा स्थायी रूप से निर्धारित होती है। इसमें पूरे दिन एक ही निर्धारित गति मान्य होती है। लेकिन अब शहरी क्षेत्रों से गुजर रहे एक्सप्रेसवे पर जाम की समस्या और दुर्घटना की आशंका से निपटने के लिए इस परिपाटी से अलग वैरिएबल स्पीड लिमिट लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसमें दिन के अलग-अलग अंतराल पर गति सीमा भिन्न होगी। जिस समय एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है, उस समय गति सीमा कम रख कर एक प्वॉइंट पर जाम की समस्या से निपटा जाएगा। उसी समय वाहन तेज दौड़ पाएंगे जिस वक्त वाहनों का दबाव कम होगा। इसका व्यवहार्यता अध्ययन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर प्रारंभिक चरण में सराय काले खां से अक्षरधाम के बीच शुरू किया जाएगा। फिर से गाजीपुर बॉर्डर तक विस्तारित किया जाएगा।

केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) 15 अगस्त से इस अध्ययन को शुरू कर सकता है, जो तीन माह चलेगा। सीआरआरआई के मुताबिक ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी में यह मॉडल सफल रहा है। सीआरआरआई के विशेषज्ञों ने बताया कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जुलाई 2024 में दो कार्यदिवस और एक सप्ताहांत यानी तीन दिन तक निगरानी की गई थी। उसमें सामने आया था कि इस पर 80 प्रतिशत दबाव कारों का है। 20 प्रतिशत भारी वाहन व प्रतिबंध के बावजूद दोपहिया वाहन चलते हैं। सुबह 7 बजे से इस पर वाहनों का दबाव बढ़ना शुरू होता है, जो शाम को 7 बजे के बाद ही कम होता है। सुबह के समय गाजियाबाद की ओर से 100 व 70 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से आ रहे वाहन अक्षरधाम मंदिर के पास आकर जाम में अटक जाते हैं। इसी तरह शाम को रिंग रोड से आ रहे वाहनों की लंबी कतार लगती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एक्सप्रेसवे पर अध्ययन के लिए समय सीमा अंतराल और परिवर्तनीय गति सीमा का निर्धारण किया गया है।

अध्ययन में देखा जाएगा प्रभाव

संसदीय समिति की संस्तुति पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम के तहत अध्ययन किया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि अध्ययन में देखा जाएगा कि वास्तविक स्थिति के अनुसार बदली गति सीमा एक्सप्रेसवे पर जाम कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने में कितनी प्रभावी साबित हो सकती है। सकारात्म परिणाम होने पर इसे स्थायी रूप से लागू करने के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी।

किस समय कितनी रफ्तार

समय अंतराल – कार – भारी वाहन

रात 12 बजे से सुबह 7 बजे तक – 65 किमी/घंटा – 50 किमी/घंटा

सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक – 55 किमी/घंटा – 45 किमी/घंटा

शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक – 60 किमी/घंटा – 40 किमी/घंटा

नहीं होगा चालान

अध्ययन के दौरान परिवर्तनीय गति सीमा का कोई पालन नहीं करता तो उसका चालान नहीं होगा। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के मुताबिक अध्ययन के बारे में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को सूचित किया जाएगा। चालान को लेकर वही व्यवस्था लागू रहेगी, जो पहले से चली आ रही है।

कैरिजवे पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए

इस अध्ययन के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर तैयारी शुरू कर दी गई है। इस पर अक्षरधाम मंदिर और पांडव नगर के पास फुटओवर ब्रिज पर दोनों कैरिजवे पर अलग-अलग डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगा दिए गए हैं। इन पर गति सीमा डिस्प्ले होगी। यह बोर्ड एनएचएआई के इस एक्सप्रेसवे के कंट्रोल रूम से जुड़े हैं, जहां से अपने आप इन पर गति सीमा बदल जाएगी। इन बोर्डों के आसपास सेंसर लगाए गए हैं, जिनसे डाटा जुटाया जाएगा। कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। वाहन चालक भ्रमित न हों, इसलिए पुराने बोर्डों पर लिखी गति सीमा को छिपा दिया गया है।

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