नोएडा: ममूरा गांव की बिल्डिंग में भीषण आग, 2 लोगों की मौत, FIR दर्ज
नोएडा के सेक्टर 66 स्थित रिहायशी बिल्डिंग में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से लगी आग। धुएं में फंसने से दो लोगों की मौत। मालिक और लीजहोल्डर हिरासत में। पढ़ें पूरी अपडेट।
नोएडा के सेक्टर 66 में ममूरा गांव की एक रिहायशी बिल्डिंग के बेसमेंट में एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से निकली चिंगारी की वजह से आग लग गई। आग की लपटें तेजी से पास खड़ी गाड़ियों तक फैल गईं और धुएं ने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे दर्जनों निवासी अंदर ही फंस गए। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने मृतकों की पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली 42 साल की स्नेहा श्रीवास्तव और मध्य प्रदेश के बालाघाट के रहने वाले 27 साल के रोहित कुमार के रूप में की है। पुलिस ने बताया कि दोनों प्राइवेट कंपनियों में काम करते थे।
बिल्डिंग में लगभग 50 परिवार रहते थे
तंग गलियों में बनी इस पांच मंजिला बिल्डिंग में लगभग 50 परिवार रहते थे। स्नेहा श्रीवास्तव तीसरी मंजिल पर रहती थीं, जबकि रोहित कुमार चौथी मंजिल पर रहते थे। रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक आग की लपटों की वजह से सीढ़ियों से नीचे न आ पाने पर स्नेहा ने अपने एक रिश्तेदार को फोन किया। अधिकारी ने बताया कि वह फोन पर ‘बचाओ, बचाओ’ कहती रहीं। रिश्तेदार ने बताया कि स्नेहा अकेले रहती थीं और परिवार का खर्च उठाने के लिए एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थीं। उनके पिता और भाई-बहन मुजफ्फरपुर में रहते हैं।
मालिक और लीजहोल्डर पर एफआईआर
सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि स्थानीय पुलिस और फायर विभाग के अधिकारी सात फायर टेंडर और एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म के साथ मौके पर पहुंचे। फायर टीम ने आग बुझाई और बिल्डिंग में रह रहे लगभग 50 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, एक पुरुष और एक महिला धुएं के कारण बेहोश पड़े थे। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डीसीपी ने बताया कि बिल्डिंग के मालिक और लीजहोल्डर के खिलाफ लापरवाही के आरोप में एफआईआर दर्ज कर दोनों को हिरासत में ले लिया गया है।
तंग गलियों की वजह से बचाव अभियान में देरी
सामने वाली बिल्डिंग में रहने वाले साहिल ने बताया कि उन्होंने मदद के लिए चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनीं। सुबह करीब 11:30 बजे एक बच्चे के चिल्लाने की आवाज सुनकर वह अपनी बिल्डिंग की छत पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि दूसरे लोगों के साथ मिलकर दो छतों के बीच लकड़ी की सीढ़ी को रखकर कामचलाऊ पुल बनाया। उन्होंने कहा कि हमने 20 लोगों को बचाया। साहिल ने बताया कि तंग गलियों की वजह से फायर ब्रिगेड के बचाव अभियान में देरी हुई। गाड़ियों को गली के मुहाने पर ही रोकना पड़ा और फायरफाइटर्स को इमारत तक पहुंचने के लिए होज पाइप खींचकर ले जाने पड़े।
आग बहुत तेजी से फैल गई
बिल्डिंग की पहली मंडिल पर रहने वाले आंस चौधरी ने बताया कि वह पिछले छह साल से यहां रह रहे हैं। उनकी कंपनी गुड़गांव में है, लेकिन वह घर से काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अचानक मुझे जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी। बेसमेंट में खड़ी गाड़ियों के फ्यूल टैंक एक-एक करके फट रहे थे। वहां फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद थे और लोगों ने पानी से भी आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग बहुत तेजी से फैल गई। उन्होंने कहा कि अगर यह घटना रात में हुई होती तो कई लोग सोते हुए ही मारे जाते।