भागलपुर विक्रमशिला सेतु हादसा: जांच में ‘एलिगेटर क्रैकिंग’ का खुलासा, बढ़ी मुश्किलें
विक्रमशिला सेतु हादसे की जांच में 'एलिगेटर क्रैकिंग' और मेंटेनेंस की कमी सामने आई है। पुल का 36 मीटर स्पैन गिरने से यात्रियों के लिए 18 किमी की दूरी अब 160 किमी हुई।
बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद लगातार जांच जारी है, जिस जगह पर दो पिलर के बीच का स्लैब गंगा नदी में गिरा था. वहां पटना से आई इंजीनियरों की टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से का गहन निरीक्षण किया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पुल के अंदरूनी हिस्से में एलिगेटर क्रैकिंग (मगरमच्छ की खाल जैसी दरारें) पाई गई हैं, जबकि अन्य सभी हिस्से सुरक्षित और दुरुस्त बताए जा रहे हैं.
इंजीनियर और एक्सपर्ट के साथ-साथ एनआईटी और आईआईटी की टीम ने भी स्थल की गहन जांच की है, जिसमें कई खामियां पाई गई हैं. अधिकारियों के अनुसार करीब एक महीने पहले भेजी गई 36 करोड़ रुपये की एलॉटमेंट से इस क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करवाया जाएगा. वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बॉल-बियरिंग बदले जाने पर यह दुर्घटना टाली जा सकती थी.
एलिगेटर क्रैकिंग का खुलासा
बता दें कि एलिगेटर क्रैकिंग ऐसी दरारें होती हैं जो सड़क या कंक्रीट की सतह पर जालीनुमा पैटर्न में फैलती हैं. यह आमतौर पर संरचना की कमजोरी या लंबे समय तक दबाव पड़ने के कारण होती हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि पुल के इस हिस्से में समय के साथ दबाव बढ़ा और मेंटेनेंस में कमी रही. विशेष रूप से बॉल-बियरिंग समय पर न बदले जाने को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है. पुल के कुछ हिस्सों की विस्तृत तकनीकी जांच अभी बाकी है. इंजीनियरों की टीम आगे भी निरीक्षण करेगी ताकि किसी अन्य संभावित खतरे का पता लगाया जा सके.
बढ़ी मुश्किलें और लंबा सफर
विक्रमशिला सेतु के ऊपर क्षतिग्रस्त हिस्से के समीप जाकर स्थिति का जायजा लिया, यहां फिलहाल जांच जारी है. 4 मई की मध्य रात्रि में 36 मीटर का स्पैन गंगा नदी में समा गया था. मौके पर बीएसएनएल के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद है जो वायरिंग को दुरुस्त कर रहे हैं. वहीं गंगा नदी में और पुल के ऊपर एक्सपोर्ट लगातार जांच कर रहे हैं. फिलहाल लाखों लोगों की परेशानी बढ़ गई है जो यात्रा 15 मिनट में तय होती थी. अब नाव के सहारे ढेर से 2 घंटे का वक्त लग रहा है, वहीं भागलपुर से नवगछिया की दूरी सड़क मार्ग से 18 किलोमीटर की जगह अब 160 किलोमीटर की हो गई है.