भारत में चांदी का आयात 81% गिरा: जानें सरकार के नए नियमों का असर
मई महीने में भारत में चांदी का आयात 81.6% तक कम हो गया है। सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी और लाइसेंस नियमों में किए हैं बड़े बदलाव। जानें क्या है पूरा मामला।
भारत में चांदी की आवक पर अचानक ब्रेक लग गया है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि मई महीने में देश का चांदी आयात लगभग 81.6 फीसदी तक गिर गया है. अप्रैल में जहां 411 मिलियन डॉलर की चांदी विदेशों से आई थी, वहीं मई में यह आंकड़ा सिमटकर सिर्फ 76 मिलियन डॉलर रह गया. इस भारी गिरावट के पीछे केंद्र सरकार के दो बड़े फैसले हैं.पहला, आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% करना, दूसरा, चांदी को प्रतिबंधित श्रेणी में डालना.
क्यों सख्त हुई सरकार?
पिछले कुछ समय से भारत में चांदी की मांग बेतहाशा बढ़ रही थी. वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी का आयात करीब 149.6% की भारी छलांग लगाते हुए 12.05 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंचा था. जबकि इसके ठीक एक साल पहले यह आंकड़ा महज 4.83 अरब डॉलर ही था. विदेशी मुद्रा के भारी मात्रा में बाहर जाने तथा आयात की इस असामान्य तेजी पर लगाम कसने के मकसद से ही सरकार को यह सख्त कदम उठाना पड़ा.
दुबई के रास्ते चल रहा था बड़ा खेल
ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद एक नई तरह की तकनीकी समस्या सामने आ गई थी. भारत और यूएई के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के चलते दुबई से चांदी मंगाने पर टैक्स में भारी छूट मिल रही थी. अन्य देशों पर 15% सामान्य ड्यूटी तथा यूएई के रास्ते आने वाली चांदी के शुल्क में 8 प्रतिशत का बड़ा अंतर पैदा हो गया. नतीजतन, कारोबारियों ने मुनाफा कमाने के लिए यूएई रूट का जमकर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिससे आयात कम होने के बजाय हेरफेर बढ़ने की आशंका पैदा हो गई.
लाइसेंस राज की वापसी से लगा ब्रेक
इस खामी को दूर करने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने तुरंत मोर्चा संभाला. 16 मई को एक अहम अधिसूचना जारी कर चांदी के आयात को ‘प्रतिबंधित’ (Restricted) सूची में डाल दिया गया. इसका सीधा सा अर्थ है कि अब कोई भी व्यापारी बिना सरकारी लाइसेंस के विदेशों से चांदी नहीं मंगा सकता. भारी टैक्स तथा लाइसेंस की अनिवार्यता की दोहरी मार का नतीजा यह हुआ कि महज एक महीने के भीतर ही चांदी का विदेशी व्यापार चार से पांच गुना तक सिकुड़ गया.
अब बाजार के जानकारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार भविष्य में कितने आयात लाइसेंस जारी करती है. व्यापारी चाहें तो 15% की पूरी ड्यूटी चुकाकर या यूएई से तरजीही नियमों के तहत व्यापार कर सकते हैं, लेकिन बिना सरकारी मंजूरी के यह संभव नहीं होगा. वहीं, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि सोने पर ऐसी पाबंदी नहीं लगी है. दरअसल, यूएई ट्रेड डील के तहत सोने पर मिलने वाला टैरिफ फायदा बेहद मामूली है, जिससे वहां कारोबारियों के लिए हेरफेर करने की कोई खास गुंजाइश नहीं बचती है.