भिवानी: अरावली की 11 पहाड़ियों के संरक्षण के लिए 12 करोड़ की योजना
भिवानी वन विभाग ने अरावली की 11 पहाड़ियों के संरक्षण के लिए 12.15 करोड़ का मास्टर प्लान भेजा। 4.63 लाख पौधे, तालाब निर्माण और भूस्खलन रोकने के होंगे प्रबंध।
भिवानी। अरावली पर्वत शृंखला की 11 पहाड़ियों में वन संपदा, पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग ने 12,13, 15,973 रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का मास्टर प्लान तैयार कर मुख्यालय भेज दिया है। योजना के तहत करीब 463 हेक्टेयर क्षेत्र में 4,63,000 से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कंटीले तार और दीवारें बनाई जाएंगी तथा भूस्खलन रोकने और वर्षा जल संचयन के लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे।
वन मंडल भिवानी द्वारा तैयार इस परियोजना के तहत अरावली की 11 पहाड़ियों में वन आरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों के अधीन आने वाली भूमि को भी शामिल किया गया है। योजना के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा और पौधों के संरक्षण के लिए जरूरी सभी उपाय किए जाएंगे ताकि भविष्य में वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सके।
परियोजना के तहत पहाड़ी क्षेत्रों में कंटीले तार लगाए जाएंगे तथा आवश्यकता के अनुसार दीवारों का निर्माण भी किया जाएगा। इसके अलावा मिट्टी के कटाव और भूस्खलन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। वर्षा जल के संचयन के लिए पहाड़ियों की तलहटी में आठ तालाब अथवा कुंड बनाए जाएंगे जिनसे पौधों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा और वन्य जीव भी अपनी प्यास बुझा सकेंगे। वन विभाग ने इन कार्यों के लिए स्थानों का भी चयन कर लिया है।
वन विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों के आसपास ग्राम पंचायतों की उन जमीनों को भी परियोजना में शामिल किया है जो वन आरक्षित क्षेत्र के नजदीक स्थित हैं ताकि घटते वन क्षेत्र को संरक्षित किया जा सके।
ये हैं अरावली पर्वत शृंखला की 11 पहाड़ियों का क्षेत्र
भिवानी जिले में अरावली पर्वत शृंखला के अंतर्गत डाडम पहाड़, खानक पहाड़, निगाना की पहाड़ी, रिवासा की पहाड़ी, दुल्हेड़ी, खरकड़ी माखवान, धारण, सरल और तोशाम क्षेत्र शामिल हैं। इसी प्रकार देवसर और नकीपुर की पहाड़ियां भी इस शृंखला का हिस्सा हैं। इन पहाड़ी इलाकों में वन विभाग परियोजना के तहत पौधरोपण करेगा, कंटीले तार लगाएगा, सीमेंट के ट्री गार्ड स्थापित करेगा तथा वर्षा जल संचयन के लिए कुंडों का निर्माण कराया जाएगा।
अरावली पर्वत शृंखला के इन हिस्सों में होता है खनन
डाडम पहाड़ करीब 50 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। क्षेत्रफल के हिसाब से इसके अधिकांश हिस्से में पिछले करीब 40 वर्षों से खनन गतिविधियां जारी हैं। इसका असर यह हुआ है कि पहाड़ी क्षेत्र में लगातार मिट्टी का कटाव हो रहा है जिससे पौधे भी नष्ट हो जाते हैं।
तोशाम क्षेत्र के खानक पहाड़ का दायरा 258.30 हेक्टेयर में फैला है जहां खनन कार्य भी चल रहा है। खनन के दौरान होने वाली ब्लास्टिंग से हरियाली वाले क्षेत्रों में कंपन पैदा होता है जिससे पौधों की जड़ें प्रभावित होती हैं। जबकि वन विभाग यहां बारिश के मौसम में प्रति हेक्टेयर नए पौधे रोपित करता है। डाडम पहाड़ का खनन वाला हिस्सा 400 से 500 फीट गहरी खाई में तब्दील हो चुका है।
पहाड़ियों पर धार्मिक महत्व के पौधे रोपित करेगा वन विभाग
वन विभाग 11 पहाड़ियों की इस परियोजना के तहत धार्मिक महत्व वाले पौधे रोपित करेगा। इनमें बेलपत्र सहित अन्य प्रजातियां शामिल होंगी। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद कंटीली झाड़ियों को हटाकर उनकी जगह नए पौधे लगाए जाएंगे। प्राकृतिक रूप से पनपने वाले पेड़ों को भी संरक्षित और पोषित किया जाएगा ताकि उनकी बढ़वार सुनिश्चित हो सके। इसी प्रकार चहड़ पहाड़ी पर ग्राम पंचायत की भूमि पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी।
छह माह में 10 हजार हरे पेड़ चढ़ गए मौसम की भेंट
करीब छह माह के दौरान जिले में लगभग 10 हजार हरे पेड़ मौसम की मार झेल चुके हैं। बार-बार आने वाली तेज आंधियों के कारण बड़ी संख्या में पेड़ टूटकर गिर गए हैं। वन विभाग का अधिकांश क्षेत्र सड़क मार्ग और रेलवे लाइन के किनारे स्थित है। इसके अलावा नहरों के किनारे भी हरे पेड़ लगाए जाते हैं जबकि जिले में वन आरक्षित क्षेत्र का दायरा सीमित है। ज्यादातर पेड़ सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं की भेंट चढ़ चुके हैं जबकि बचे हुए पेड़ भी तेज आंधियों से लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इसके अलावा शरारती तत्वों द्वारा आग लगाने की घटनाओं से भी पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है।
अरावली पर्वत शृंखला की 11 पहाड़ियों में वन संपदा संरक्षण के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की गई है। इस परियोजना को मुख्यालय भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से इस दिशा में काम किया जाएगा। अरावली पर्वत शृंखला में धार्मिक महत्व के पौधे लगाए जाएंगे, जरूरत के हिसाब से दीवार और कंटीले तार भी लगाए जाएंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में वन्य जीवों को भी पेड़ों और पर्यावरण की वजह से संरक्षण मिलेगा। पहाड़ों में भूस्खलन को रोकने के साथ वर्षा जल का संचयन भी किया जाएगा।