मलदहिया और कैंट समेत ये 4 इलाके बने HIV हॉटस्पॉट, बनारस और BHU के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

वाराणसी में बीते 9 महीनों में 300 से ज्यादा नए HIV पॉजिटिव मरीज मिले हैं। 18-25 वर्ष के युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। जानिए शहर के हॉटस्पॉट और जांच केंद्रों की जानकारी।

धर्मनगरी वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य महकमे और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। जनपद में जनवरी से सितंबर तक (बीते 9 महीनों के दौरान) 300 से अधिक नए एचआईवी (HIV) संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है। यदि वाराणसी के साथ-साथ चंदौली, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर और पड़ोसी राज्य बिहार से आने वाले मरीजों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 700 के पार पहुंच जाती है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के आईसीटीसी (ICTC) सेंटर में 171 और बीएचयू (BHU) अस्पताल में करीब 150 मरीजों की पुष्टि हुई है। आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि नए मामलों में 18 से 25 वर्ष के युवाओं और प्रवासी मजदूरों की संख्या सबसे अधिक है, जिनमें असुरक्षित समलैंगिक संबंध और नशीली दवाओं के लिए एक ही सिरिंज का इस्तेमाल मुख्य कारण बनकर उभरा है।

💉 एक ही सिरिंज से नशा करने वाले 35% मरीज: 2 महिलाओं की मौत, शहर के ये 4 क्षेत्र बने एचआईवी हॉटस्पॉट

दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित ओएसटी (OST) सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, एचआईवी फैलने का दूसरा बड़ा कारण नशीले पदार्थों के लिए दूषित सिरिंजों का दोबारा इस्तेमाल है। पिछले दो वर्षों में 30 ऐसे मरीज पाए गए जिन्होंने एक ही सिरिंज से नशीला इंजेक्शन लिया था, जिनमें से 2 महिलाओं की इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है। कुल पॉजिटिव मामलों में लगभग 35% मामले इंजेक्टेबल ड्रग्स से जुड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने वाराणसी शहर के 4 प्रमुख क्षेत्रों—मलदहिया, शिवदासपुर, कैंट और सदर बाजार—को एचआईवी हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया है।

📞 मुफ्त जांच, 1097 हेल्पलाइन और I-SCAN ऐप: वाराणसी में इन केंद्रों पर उपलब्ध है निशुल्क परामर्श

वाराणसी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल (रामनगर) और बीएचयू सहित 6 केंद्रों पर निशुल्क एचआईवी जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। एचआईवी/एड्स से जुड़ी जानकारी, परामर्श या नजदीकी एआरटी (ART) सेंटर का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1097 जारी की गई है। इसके अलावा, एचआईवी से बचाव और खुद के जोखिम का आकलन (Self-Risk Assessment) करने के लिए डिजिटल टूल आई-स्कैन (I-SCAN) ऐप का उपयोग किया जा सकता है, जो युवाओं को सही जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करने में मदद करता है।

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