मानसून सत्र के हंगामेदार होने के आसार, प्रश्नकाल और काम रोको प्रस्ताव पर टिकी सबकी नजरें

हरियाणा विधानसभा सत्र को लेकर कांग्रेस ने बुलाई बैठक। भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन।

चंडीगढ़ :  हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन के भीतर और बाहर हुए घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की तैयारी कर ली है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 31 अगस्त को सुबह 11 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि बैठक में पहले दिन सदन में हुए घटनाक्रम, कांग्रेस विधायकों के साथ कथित तौर पर हुए व्यवहार और आगामी दो दिनों की रणनीति पर विस्तार से मंथन होगा।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब मानसून सत्र के अगले कार्यदिवस को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों आमने-सामने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दे तैयार किए हैं, जबकि सरकार की ओर से भी कांग्रेस के संभावित हमलों का जवाब देने की पूरी तैयारी किए जाने के संकेत हैं।

हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल को ज्ञापन
कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपेंगे। कांग्रेस की ओर से विधानसभा के पहले दिन सदन में हुए घटनाक्रम को गंभीरता से उठाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस विधायक दल एकजुट है और इसे विधानसभा के बाहर भी उठाया जाएगा।

थानेसर से कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ नेता अशोक अरोड़ा ने बताया कि कांग्रेस सोमवार को विधानसभा में बैंक स्कैम को लेकर काम रोको प्रस्ताव लाएगी। इसके साथ ही कांग्रेस की ओर से हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठाए जाने की तैयारी है। इससे साफ है कि कांग्रेस मानसून सत्र में सरकार को वित्तीय अनियमितताओं, रोजगार और भर्ती व्यवस्था जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

सबसे बड़ा सवाल-प्रश्नकाल चलेगा या काम रोको प्रस्ताव पर अड़ेगी कांग्रेस?
सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस विधायक दल सदन की सामान्य प्रक्रिया के तहत प्रश्नकाल और शून्यकाल को सामान्य रूप से चलने देता है या फिर बैंक स्कैम के मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव को तत्काल चर्चा के लिए स्वीकार करने की मांग पर अड़ता है। विपक्ष के लिए यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फैसला होगा। यदि कांग्रेस काम रोको प्रस्ताव को लेकर आक्रामक रुख अपनाती है तो सदन की कार्यवाही के शुरुआती दौर में ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर, यदि कांग्रेस प्रश्नकाल और शून्यकाल को चलने देती है तो इन दोनों महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के माध्यम से सरकार से अपने सवालों के जवाब मांगने का रास्ता खुला रहेगा।

पहले दिन के घटनाक्रम का असर अगले दो दिन पर
मानसून सत्र के पहले दिन सदन के अंदर हुए घटनाक्रम का असर सोमवार और मंगलवार की कार्यवाही पर पड़ना तय माना जा रहा है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इसी विषय पर विस्तृत चर्चा संभावित है। विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ उन विषयों पर भी चर्चा कर सकते हैं, जिनके माध्यम से सरकार को सदन में घेरा जा सकता है।

कांग्रेस के सामने एक ओर सदन में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह अपने विधायकों और जनहित के मुद्दों पर पीछे हटने वाली नहीं है। ऐसे में हुड्डा की बैठक को विधानसभा की आगे की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सत्ता पक्ष भी पूरी तैयारी में, मंत्रियों की रहेगी अहम भूमिका
दूसरी तरफ सत्ता पक्ष भी विपक्ष की रणनीति पर लगातार नजर रखे हुए है। सरकार की ओर से कांग्रेस के संभावित हमलों का जवाब देने के लिए मंत्रियों और सत्तापक्ष के प्रमुख नेताओं को अलग-अलग मुद्दों पर तैयार रहने के निर्देश होने की संभावना है।

सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री महीपाल ढांडा, कृष्ण बेदी और विपुल गोयल जैसे नेता सदन में सरकार का पक्ष मजबूती से रखते नजर आ सकते हैं। विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर विभागीय तथ्यों और सरकार की उपलब्धियों के आधार पर जवाब देने की तैयारी की जा रही है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी संभाल सकते हैं मोर्चा
इन सबके बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भूमिका पर भी निगाहें रहेंगी। मुख्यमंत्री विधानसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के साथ-साथ सरकार की नीतियों और फैसलों का बचाव करने के लिए स्वयं मोर्चा संभाल सकते हैं। विभिन्न विभागों और सरकार की योजनाओं पर उनकी पकड़ को देखते हुए सत्ता पक्ष की रणनीति में मुख्यमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। बैंक स्कैम, HKRN और विधानसभा के पहले दिन के घटनाक्रम जैसे मुद्दों पर यदि विपक्ष आक्रामक होता है तो मुख्यमंत्री और सरकार के वरिष्ठ मंत्री मिलकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते नजर आ सकते हैं।

सोमवार को टकराव के साथ संवाद की भी परीक्षा
सोमवार की कार्यवाही हरियाणा की विधानसभा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ कांग्रेस विधायक दल की बैठक और राज्यपाल को ज्ञापन के जरिए विपक्ष अपना रुख स्पष्ट करेगा, तो दूसरी तरफ सदन के भीतर काम रोको प्रस्ताव और अन्य मुद्दों पर उसकी रणनीति की परीक्षा होगी।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच असली परीक्षा विधानसभा की कार्यवाही को लेकर होगी। क्या प्रश्नकाल और शून्यकाल सामान्य रूप से चलेंगे, क्या बैंक स्कैम पर तत्काल चर्चा होगी और क्या सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव फिर बढ़ेगा—इन सवालों के जवाब सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान सामने आएंगे। फिलहाल दोनों पक्षों की तैयारियों को देखते हुए मानसून सत्र का अगला दिन भी सियासी गर्माहट से भरपूर रहने के आसार हैं।

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