ये सिर्फ एक दुकान नहीं, ये भारत के सबसे बड़े स्वाद के साम्राज्य की जन्मभूमि है!
ये हैं बीकानेर के भुजिया बाजार, बड़ा बाजार स्थित हल्दीराम की पुश्तैनी दुकान। आज भी वही नीले दरवाजे, वही पुराना बोर्ड - "हल्दीराम भुजियावाला - मूंग पापड़ के थोक व खुदरा व्यापारी"
ये सिर्फ एक दुकान नहीं, ये भारत के सबसे बड़े स्वाद के साम्राज्य की जन्मभूमि है!
आप जो फोटो देख रहे हैं, ये हैं बीकानेर के भुजिया बाजार, बड़ा बाजार स्थित हल्दीराम की पुश्तैनी दुकान। आज भी वही नीले दरवाजे, वही पुराना बोर्ड – “हल्दीराम भुजियावाला – मूंग पापड़ के थोक व खुदरा व्यापारी”
इसी 10×10 की छोटी सी दुकान से आज 8000 करोड़ से ज्यादा का एम्पायर खड़ा हुआ है।

लेकिन सबसे बड़ी बात
आज इतना बड़ा एम्पायर, तीन अलग-अलग कंपनियां, सैकड़ों फैक्ट्री और हजारों करोड़ का टर्नओवर होने के बाद भी अग्रवाल परिवार ने अपनी जड़ों को नहीं भूला।
बीकानेर की ये छोटी सी पुस्तैनी दुकान आज भी खुलती है। आज भी वहाँ भुजिया बेची जाती है। बोर्ड पर आज भी वही पुराना नाम है। कोई AC शोरूम नहीं, कोई बड़ा बोर्ड नहीं, बस वही नीले किवाड़ और पानी के कैंपर।
ये दुकान हमें सिखाती है – *आप कितने भी बड़े बन जाओ, अपनी जड़ को कभी मत भूलो। असली सफलता वही है जो अपनी शुरुआत को याद रखे।*
अगर आप कभी बीकानेर जाएं, तो भुजिया बाजार में इस दुकान के दर्शन जरूर करें। ये सिर्फ भुजिया की दुकान नहीं, ये हिंदुस्तान के स्वाद के इतिहास का तीर्थ है