रेवाड़ी: नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम की अटकी राशि, 787 परिवार परेशान
रेवाड़ी में 3 वर्षों से नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम के 787 मामले लंबित। 1.57 करोड़ की सहायता राशि के लिए दर-दर भटक रहे बीपीएल परिवार।
रेवाड़ी : सरकार द्वारा बीपीएल परिवारों के लिए संचालित नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम जिले में अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। योजना के तहत परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को एकमुश्त 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से सैकड़ों पात्र परिवार इस सहायता राशि के लिए भटकने को मजबूर हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रेवाड़ी जिले में वर्ष 2023 से अब तक इस योजना के 787 मामले लंबित हैं। इन सभी मामलों में जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा केंद्र सरकार को राशि आवंटित करने के लिए सिफारिश भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक बजट जारी नहीं होने के कारण लाभार्थियों को सहायता राशि नहीं मिल पाई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 178, वर्ष 2024-25 में 372 तथा वर्ष 2025-26 में 237 लाभार्थियों के आवेदन लंबित हैं। इस प्रकार तीन वर्षों में कुल 787 पात्र लाभार्थियों की 1 करोड़ 57 लाख 40 हजार रुपये की सहायता राशि अटकी हुई है। योजना का उद्देश्य परिवार के कमाऊ सदस्य अथवा मुखिया की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करना है, लेकिन सहायता समय पर न मिलने से प्रभावित परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लाभार्थी बार-बार समाज कल्याण विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक सहायता राशि नहीं मिल सकी है।
गरीब परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनने वाली यह योजना फिलहाल सहायता से अधिक परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है। जिन परिवारों ने अपने मुखिया को खोया है, वे आर्थिक तंगी के बीच सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन वर्षों बाद भी राहत नहीं मिल पाई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी रेणु बाला के अनुसार लंबित मामलों की रिपोर्ट और राशि की मांग संबंधित विभाग को भेजी जा चुकी है। केंद्र सरकार से बजट प्राप्त होते ही पात्र लाभार्थियों के खातों में सहायता राशि जारी कर दी जाएगी। अब सवाल यह है कि गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ उन्हें आखिर कब मिलेगा। पिछले तीन वर्षों से अपने हक की राशि का इंतजार कर रहे सैकड़ों परिवारों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।