लखनऊ अग्निकांड: कोचिंग सेंटर्स में मौत का जाल, क्या आपके बच्चे सुरक्षित हैं?

लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतों के बाद कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा पर बड़े सवाल। बिना NOC और संकरी सीढ़ियों के कैसे चल रहे हैं हज़ारों कोचिंग सेंटर? पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट।

यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनीमेशन सेंटर (गेमिंग और एनिमेशन कोचिंग) में सोमवार को भीषण आग लगने की दर्दनाक घटना सामने आई, जिसमें 15 बच्चों की जान चली गई. हादसे की जांच के लिए सीएम योगी ने SIT जांच का गठन किया है. शुरुआती जांच में पता चला कि इस एनीमेशन सेंटर में भी फायर के तमाम नियम-कानून का उल्लंघन किया जा रहा था. वहीं देश की राजधानी दिल्ली में भी कोचिंग सेंटर में आग लगने के कई बड़े मामले पहले हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है. इन कोचिंग सेंटर्स के संचालक बिना फायर NOC के फायर के नियमों को ताक पर रख कर यह कोचिंग सेंटर चलाते हैं. अगर कोई हादसा होता है तो इनमें मरने वालों की संख्या काफी ज्यादा हो जाती है.

लखनऊ हादसे के बाद पुनीत शर्मा ने कोचिंग सेंटर्स के गढ़ माने जाने वाले लक्ष्मी नगर, शकरपुर इलाके में जाकर रियलिटी चेक किया तो देखा कि ज्यादातर कोचिंग सेंटर में नियमों की अनदेखी की जा रही थी. शकरपुर में खुले बिजली के तारों का जाल है. उन्हीं से सटे हुए कोचिंग सेंटर चल रहे हैं. कोचिंग सेंटर में जाने की करीब डेढ़ से 2 फीट की सकरी एक सीढ़ी होती है. एंट्री और एग्जिट के लिए बस यही एक सीढ़ी होती है और ऊपर पहुंचने पर कमरों में भी किसी भी तरह की कोई एग्जिट नहीं होता. यानी अगर किसी हादसे की वजह से आग लगती है तो लोग कोचिंग सेंटर में फंसे रह जाएंगे.

छोटे-छोटे केबिन बनाकर बच्चों को बैठाया जाता

ऐसा ही एक और कोचिंग सेंटर है, जो काफी बड़ा है. कोचिंग सेंटर में ऊपर जाने के लिए एक संकरी सीढ़ी है. एग्जिट के लिए भी इसी सीढ़ी का इस्तेमाल होता है. ऊपर अलग-अलग छोटे-छोटे केबिन बनाए गए हैं, जिनमें बच्चे अपनी पढ़ाई करते हैं. इनमें कई AC लगे हुए हैं. कोचिंग सेंटर के पीछे की तरफ बालकनी में लोहे की जाली लगी है. दूसरी तरफ भी गेट लगा हुआ है. यानी अगर आग लगती है तो कोई भी न तो पीछे की तरफ से और न ही आगे की तरफ से बाहर निकल सकता है या ऊपरी मंजिल से कूद कर अपनी जान बचाने की कोशिश कर सकता है, बल्कि उसी में फंसा होकर रह जाएगा और आग से या दम घुटने से उसकी मौत हो सकती है.

एक दो कोचिंग सेंटर में फायर एक्सटिंग्विशर हैं, लेकिन वह एक्सपायर हो चुके हैं. इसके अलावा कई कोचिंग सेंटर ऐसे हैं, जिनमें बायोमेट्रिक लॉक लगा हुआ है. यानी शॉर्ट सर्किट होने पर यह दरवाजे अपने आप लॉक हो जाएंगे और अंदर के लोग अंदर ही फंसे रह जाएंगे. वह बाहर नहीं निकाल पाएंगे. हादसे के सूरत में मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है.

सिर्फ डेढ़ फीट चौड़ी सीढ़ियों से आते-जाते हैं बच्चे

लक्ष्मी नगर में ऐसी ही एक और लाइब्रेरी है, जो करीब डेढ़ फीट चौड़ी सीढ़ियों से ऊपर की तरफ जाती है. अंदर बायोमेट्रिक लगा हुआ है. लाइब्रेरी संचालक ने कबूल किया कि उनके पास फायर की NOC नहीं है. बताया कि यहां किसी भी कोचिंग सेंटर के पास फायर NOC नहीं है. इस लाइब्रेरी में भी AC लगे हैं. निकालने के लिए कोई भी जगह नहीं है. यानी बच्चों की जिंदगी के साथ यह कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी वाले खिलवाड़ कर रहे हैं.

3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौजरानी में एक होटल में आग लग गई थी, जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई, जिसमें ज्यादातर विदेशी लोग थे. इस होटल के पास भी फायर NOC नहीं थी. नियमों के विपरीत बेसमेंट बनाया गया था और एंट्री और एग्जिट का सिर्फ एक रास्ता था. शॉर्ट सर्किट के बाद जब आग लगी तो बायोमेट्रिक गेट होने की वजह से दरवाजे लॉक हो गए और लोग अंदर ही फंसे रह गए, जिससे आग में जलकर और दम घुटने से 24 लोगों की मौत हो गई.

24 मौतों का जिम्मेदार कौन?

ऐसे हादसों के बाद प्रशासन थोड़े समय के लिए दिखावा करते हुए हरकत में आता है. होटल के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार किया गया, उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया. कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 24 मौतों की जिम्मेदारी उनके ऊपर थोपी गई. इस वक्त वह तीनों जेल में हैं. थोड़े समय में जेल से बाहर आ जाएंगे, लेकिन सवाल यह उठता है कि 24 मौत का असली जिम्मेदार कौन है?

प्रशासन ने मालवीय नगर इलाके के कुछ होटल को सील किया, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे थे. इन होटल के दरवाजे पर एमसीडी ने सील लगाई है, लेकिन दिल्ली में अभी भी लाखों कोचिंग सेंटर और होटल बिना फायर NOC और बिना फायर के नियमों का पालन करते हुए चला जा रहे हैं. लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

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