सावन शिवरात्रि और नाग पंचमी का अद्भुत महायोग, जानिए जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त व पूजा विधि
सावन शिवरात्रि और नाग पंचमी के दुर्लभ महायोग पर जानिए जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त, कालसर्प दोष मुक्ति उपाय और भगवान शिव की संपूर्ण पूजा विधि।
कुरुक्षेत्र: सावन का पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना का सबसे प्रिय समय माना जाता है. इस पूरे माह में शिव भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए जप, तप और उपवास करते हैं. सावन माह की शिवरात्रि का श्रद्धालुओं को इंतजार रहता है. इस बार सावन शिवरात्रि के दिन एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ महायोग बन रहा है, क्योंकि इस बार शिवरात्रि के साथ ही सावन के महीने में चौथे सोमवार को नाग पंचमी का महापर्व भी मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देव भगवान शिव के गले का हार हैं. ऐसे में सावन शिवरात्रि और नाग पंचमी का पड़ना शिव भक्तों और विशेष रूप से ज्योतिषीय उपाय करने वालों के लिए अत्यंत फलदायी साबित होने वाला है.
पूरे दिन कर सकेंगे जलाभिषेक, जानें शुभ मुहूर्त: सावन शिवरात्रि पर महादेव को जल अर्पित करने के लिए पूरा दिन ही अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है. भक्त प्रातः 04:00 बजे से लेकर मध्यरात्रि 12:00 बजे तक भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं.यदि आप विशेष मुहूर्त में पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो यह समय सबसे उत्तम रहेंगे.
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:23 बजे से प्रातः 06:00 बजे तक.
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक.
गोधूलि मुहूर्त: रात्रि 09:13 बजे से रात्रि 09:32 बजे तक.
निशिता काल मुहूर्त: मध्यरात्रि 12:05 बजे से रात्रि 12:48 बजे तक.
कालसर्प दोष मुक्ति का विशेष योग: कालेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी राकेश शास्त्री के अनुसार, “इस बार सावन शिवरात्रि नाग पंचमी सावन में सोमवार को आ रही है तो इस संयोग होने से एक विशेष महायोग निर्मित हो रहा है. जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए यह दिन वरदान के समान है. इस महायोग में महादेव और नाग देव की विधिवत पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है और जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं.”
कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक का महत्व: सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है. श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार दूर-दूर से कांवड़ में गंगाजल लेकर आते हैं और शिवरात्रि के दिन महादेव का जलाभिषेक करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भक्तिभाव से किया गया जलाभिषेक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाता है तथा भगवान शिव की अनुकंपा सदैव बनी रहती है.
सावन शिवरात्रि की संपूर्ण पूजा विधि:
- महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
- इस दिन प्रातकाल जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
- इसके बाद पूजा स्थल या मंदिर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें.
- फिर शिवलिंग पर सर्वप्रथम शुद्ध जल और गंगाजल चढ़ाएं.
- इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत) से बारी-बारी से अभिषेक करें.
- फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं.
- उसके बाद शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं.
- इसके बाद महादेव के प्रिय बेलपत्र, धतूरा, आक (आंकड़े) के फूल, भांग, अक्षत (बिना टूटे चावल) और ताजे पुष्प अर्पित करें.
- फिर भगवान शिव को मौसमी फलों और मिष्ठान का भोग लगाएं.
- इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें और शिव चालीसा का पाठ करें.
- अंत में देशी घी या कपूर जलाकर आरती करें और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें.