सेवानिवृत्त शिक्षक की पेंशन रोकने पर हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार से मांगा जवाब

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षक ललित भारद्वाज की पेंशन रोके जाने के मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक की पेंशन रोके जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता ललित भारद्वाज का पक्ष रखते हुए वकीलों ने बताया कि सेना में नियमानुसार नाम में बदलाव किए जाने के बाद भी बीएड (B.Ed) डिग्री में नाम के मामूली अंतर को आधार बनाकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कर दी गई थी। हालांकि, पुलिस जांच में डिग्री पूरी तरह सही पाई गई और जांच अधिकारी ने अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट (रद्द करने की रिपोर्ट) भी पेश कर दी थी, इसके बावजूद अप्रैल 2026 में उनकी पेंशन रोक दी गई।

🎖️ भारतीय सेना में 12 साल और शिक्षा विभाग में 20 साल दी बेदाग सेवाएं: 31 दिसंबर 2024 को हुए थे रिटायर

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में 12 वर्ष से अधिक समय तक देश की सेवा की। चिकित्सा कारणों से सेना से मुक्त होने के बाद वे शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए। सेना में रहते हुए वर्ष 1991 में ही उन्होंने नियमों के तहत अपना नाम ‘लाला राम’ से बदलकर ‘ललित भारद्वाज’ कर लिया था, जो सेना के ‘पार्ट-टू ऑर्डर’ में भी विधिवत अधिसूचित है। उन्होंने शिक्षा विभाग में 20 साल से अधिक समय तक पूरी ईमानदारी से काम किया और 31 दिसंबर 2024 को पीजीटी (अंग्रेजी) के पद से सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उन्हें द्वितीय एसीपी का लाभ नहीं दिया गया।

🔍 जांच में डिग्री सही मिलने के बावजूद पुलिस रिपोर्ट के खिलाफ विभाग ने दायर की आपत्ति

याचिकाकर्ता के खिलाफ 17 जनवरी 2026 को आईपीसी की धारा 420 के तहत मामला दर्ज हुआ था। विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री सत्यापित करने के बाद जांच अधिकारी ने 3 जुलाई 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला रद्द करने की रिपोर्ट पेश की, जिस पर शिकायतकर्ता ने भी सहमति जताई थी। हालांकि, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि विभाग ने इस रिपोर्ट के विरोध में आपत्ति याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील इस बात का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके कि 31 दिसंबर 2024 को रिटायरमेंट तक शिक्षक को कोई भी चार्जशीट या कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं दिया गया था। हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।

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