हरियाणा के 14 हजार सरकारी स्कूलों की ग्राउंड मैपिंग, पहले चरण में ₹130 करोड़ जारी
हरियाणा के 14,300+ सरकारी स्कूलों की ग्राउंड मैपिंग के बाद 2,800 विकास कार्यों के लिए ₹130 करोड़ का बजट जारी।
चंडीगढ़ : हरियाणा में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शिक्षा विभाग ने अब स्कूलवार जरूरत को विकास का आधार बनाने की तैयारी की है। प्रदेश के 14,300 से अधिक सरकारी स्कूलों की मौके पर जाकर विस्तृत मैपिंग कराई गई है। इस दौरान प्रत्येक विद्यालय में भवन, कक्षा-कक्ष, शौचालय, चारदीवारी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया। ग्राउंड सर्वे के आधार पर करीब 2,800 विकास कार्यों की पहचान हुई है। सरकार ने पहले चरण में इन कार्यों के लिए 130 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।
अब शिकायत नहीं, स्कूल की वास्तविक स्थिति बनेगी विकास का आधार
सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की प्रक्रिया में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब केवल कागजी रिपोर्ट या स्थानीय मांग के आधार पर कार्य तय नहीं होंगे। स्कूल की वास्तविक स्थिति का मौके पर आकलन कर यह तय किया जाएगा कि वहां सबसे पहले किस सुविधा की जरूरत है। ग्राउंड मैपिंग के दौरान तकनीकी अधिकारियों के साथ शिक्षा विभाग के फील्ड अधिकारियों और स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को भी शामिल किया गया। जेई सिविल, एसडीई, बीईओ, एबीआरसी तथा एसएमसी सदस्यों ने स्कूलों का निरीक्षण कर सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया।
हर स्कूल के लिए अलग माइक्रो प्लान
पूरे प्रदेश के स्कूलों की जरूरतें एक जैसी नहीं हैं। कहीं अतिरिक्त कक्षा-कक्ष की जरूरत है तो कहीं चारदीवारी की, जबकि कुछ विद्यालयों में पुराने भवनों की मरम्मत या जर्जर ढांचे को हटाने की आवश्यकता सामने आई है। इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक स्कूल के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया गया है। इसमें स्कूल की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ तत्काल और भविष्य की जरूरतों को भी शामिल किया गया है। इससे विकास कार्यों को प्राथमिकता तय करने में विभाग को मदद मिलेगी।
2,800 विकास कार्यों को जमीन पर उतारने की तैयारी
ग्राउंड मैपिंग के बाद करीब 2,800 विकास कार्य चिन्हित किए गए हैं। इनमें जर्जर और अनुपयोगी भवनों को हटाना, नए कक्षा-कक्षों का निर्माण, चारदीवारी तैयार करना, नए शौचालय बनाना तथा विभिन्न भवनों की मरम्मत और रखरखाव से जुड़े कार्य शामिल हैं। पहले चरण में सरकार ने 130 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इससे चिह्नित कार्यों को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। आगे उपलब्ध बजट और प्राथमिकता के आधार पर अन्य कार्यों को भी पूरा करने की योजना है।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं पर विशेष जोर
स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान में समावेशी शिक्षा को भी स्थान दिया गया है। दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं विकसित करने को लेकर 11.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से 484 लड़कों और 173 लड़कियों के लिए नए शौचालय बनाए जाएंगे। इसके अलावा 97 दिव्यांग-अनुकूल शौचालय और 51 रैंप तैयार किए जाएंगे। पुराने शौचालयों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के कार्य भी योजना में शामिल किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में आने-जाने और आवश्यक सुविधाओं के इस्तेमाल में किसी तरह की बाधा न हो।
एसएमसी बताएगी स्कूल की स्थानीय जरूरत
स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। एसएमसी के सदस्य स्कूल की स्थानीय परिस्थितियों और विद्यार्थियों की दैनिक जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। इसलिए ग्राउंड मैपिंग में उनकी भागीदारी से स्कूलों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने में मदद मिली। इस व्यवस्था के जरिए विभाग स्थानीय जरूरतों को तकनीकी आकलन और सरकारी प्राथमिकताओं के साथ जोड़कर विकास योजना तैयार कर रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पढ़ाई का स्तर सुधारने पर भी जोर
सरकारी स्कूलों में सुधार की रणनीति केवल भवनों और सुविधाओं तक सीमित नहीं है। सरकार की ओर से विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता बढ़ाने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। निपुण कार्यक्रम के माध्यम से बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने, सुपर-100 के जरिए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर है। फ्रेंच और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं के शिक्षण की पहल भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके साथ ही संस्कृति मॉडल स्कूल, सीएम-ईईई स्कूल और पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
बजट आवंटन में भी बदलेगा पुराना तरीका
14,300 से अधिक स्कूलों की ग्राउंड मैपिंग के बाद शिक्षा विभाग के पास अब स्कूलवार जरूरतों का विस्तृत डाटा उपलब्ध है। इसका इस्तेमाल आने वाले समय में बजट आवंटन और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में किया जा सकता है। यानी भविष्य में किसी स्कूल को केवल सामान्य श्रेणी के आधार पर बजट मिलने के बजाय उसकी वास्तविक जरूरत के आधार पर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
स्कूलों की तस्वीर बदलने की बड़ी कवायद
सरकारी स्कूलों की यह मैपिंग महज निर्माण कार्यों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य प्रदेश के सरकारी विद्यालयों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार विकसित करना है। 2,800 चिन्हित कार्यों के लिए पहले चरण में 130 करोड़ रुपये जारी होना इसी दिशा में उठाया गया कदम है। अब चुनौती इन कार्यों को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की होगी। यदि स्कूलवार माइक्रो प्लान के अनुसार निर्माण, मरम्मत और सुविधा विस्तार के कार्य पूरे होते हैं, तो इससे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बेहतर, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक वातावरण तैयार हो सकता है।