2011 के रेलवे हादसे में मृतक हेडमास्टर के परिजनों को मिली न्याय की किरण, जानिए हाईकोर्ट का पूरा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे ट्रैक पर शव मिलना खुदकुशी या नशे का सबूत नहीं है। कैथल के हेडमास्टर के परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया।
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रेल हादसों में मुआवजे से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेलवे ट्रैक के पास केवल शव मिलने से यह साबित नहीं हो जाता कि संबंधित व्यक्ति ने आत्महत्या की थी या वह शराब/नशे के प्रभाव में था।
हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे दुर्घटना में मुआवजे के दावे का सही आकलन उपलब्ध साक्ष्यों, रेलवे टिकटों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल धारणाओं के आधार पर।
🏛️ जस्टिस हरकेश मनुजा की पीठ का फैसला: ट्रिब्यूनल का मनगढ़ंत निष्कर्ष रद्द
जस्टिस हरकेश मनुजा की एकल पीठ ने कैथल के एक सरकारी स्कूल में कार्यरत हेडमास्टर स्व. सूरजभान की रेल हादसे में हुई मृत्यु से जुड़े मामले की सुनवाई की।
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रेलवे नहीं कर पाया साबित: अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे प्रशासन यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि सूरजभान ने पटरी पर जाकर आत्महत्या की थी या वह घटना के समय नशे में थे।
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ब्याज सहित मुआवजा: हाईकोर्ट ने ‘रेलवे दावा अधिकरण’ (Railway Claims Tribunal) द्वारा दावा खारिज करने के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया। इसके साथ ही पीड़ित पत्नी और अन्य आश्रितों को दावा आवेदन दाखिल करने की तिथि से 9 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज के साथ पूरा मुआवजा भुगतान करने का सख्त आदेश दिया।
📜 जानिए क्या था पूरा मामला? 2011 में ड्यूटी के दौरान लापता हुए थे हेडमास्टर
सूरजभान हरियाणा के जिला कैथल अंतर्गत मेंगरा स्थित सरकारी स्कूल में मुख्यध्यापक (हेडमास्टर) के पद पर पदस्थ थे।
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यात्रा और गुमशुदगी: वह 7 दिसंबर 2011 को अपनी ड्यूटी के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे।
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रेलवे टिकट की उपलब्धता: परिजनों के अनुसार, उन्होंने 12 दिसंबर को कुरुक्षेत्र से अंबाला कैंट और 13 दिसंबर को अंबाला कैंट से पटियाला जाने का वैध रेल टिकट खरीदा था और वह यात्री ट्रेन में सवार हुए थे।
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शव की बरामदगी: इसके बाद 14 दिसंबर 2011 को राजपुरा के पास रेलवे ट्रैक से उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था, जिसकी परिजनों ने पहचान की और नियम अनुसार रेलवे मुआवजे का दावा ठोका।
🏛️ ट्रिब्यूनल के 2016 के फैसले को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
इससे पहले रेलवे दावा अधिकरण, चंडीगढ़ ने 10 नवंबर 2016 को परिजनों के दावे को खारिज कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में माना था कि सूरजभान ट्रेन के वैध यात्री नहीं थे और उन्होंने नशे की स्थिति में आत्महत्या की थी।
ट्रिब्यूनल के इस एकतरफा फैसले से व्यथित होकर परिजनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने सभी साक्ष्यों पर पुनर्विचार करते हुए ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों को खारिज किया और पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए न्याय दिया।