लोनी का बदलेगा हुलिया: GDA ने बनाया मिनी पायलट प्रोजेक्ट, जाम से मिलेगी मुक्ति

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) लोनी को व्यवस्थित करने के लिए लाया मिनी पायलट प्रोजेक्ट। 3 चरणों में बनेगी सड़कें, अवैध कॉलोनियों पर लगेगी रोक। जानें पूरा मास्टर प्लान।

गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के हालात बदले वाले हैं. लंबे समय से अव्यवस्थित शहरी विस्तार, अवैध कॉलोनियों और भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे इस इलाके की सूरत बदलने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने एक नई योजना तैयार की है. इलाके को सुनियोजित करने के लिए जीडीए ने मिनी पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके तहत पूरे इलाके को नया रूप दिया जाएगा और व्यवस्थित किया जाएगा.

लोनी में अनियोजित बसावट और जर्जर सड़कों ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि विकास योजनाएं भी जाम और अव्यवस्था में फंसकर रह जाती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने महायोजना-2031 के तहत सड़क कनेक्टिविटी को आधार बनाकर एक नया ढांचा तैयार किया है. इस योजना में टीला मोड़ से पाइपलाइन रोड और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाले नए मार्ग विकसित किए जाएंगे, जिससे न सिर्फ ट्रैफिक का दबाव कम होगा बल्कि अंदरूनी इलाकों तक पहुंच भी आसान होगी.

तीन चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर एक मजबूत सड़क नेटवर्ट बनाने की योजना है. जीडीए के मास्टर प्लान के मुताबिक सड़क की चौड़ाई 30 मीटर तय की गई है, लेकिन शुरुआत 15 मीटर चौड़ी सड़क से की होगी ताकि काम जल्दी शुरू हो सके और लोगों को तत्काल राहत मिल सके.

प्रोजेक्ट के पहले फेज में टीला मोड़ से भारत सिटी के आगे तक 1400 मीटर लंबी सड़क, दूसरे फेज में पाइपलाइन रोड से 1270 मीटर लंबी सड़क जोड़ी जाएगी और तीसरे फेज में 550 मीटर लंबी कनेक्टिविटी सड़क बनाई जाएगी.

अवैध काॅलोनियों पर लगेगी रोक

इस योजना का एक अहम पहलू यह भी है कि सड़क बनने के बाद अवैध कॉलोनियों के अनियंत्रित फैलाव पर लगाम लगाई जा सकेगी. अभी तक कनेक्टिविटी की कमी और स्पष्ट प्लानिंग के अभाव में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब सड़क किनारे वैध नक्शा पास कराने की प्रक्रिया आसान होगी, जिससे लोगों को भी नियमों के तहत निर्माण करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

अधिग्रहण की जाएगी जमीन

परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण आपसी सहमति से किया जाएगा और इसके बदले भूमि स्वामियों को एफएआर जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं. अलग-अलग चरणों के लिए करोड़ों रुपये का बजट भी तय किया गया है.

प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि पूरे लोनी क्षेत्र को एक व्यवस्थित शहरी ढांचे में ढालना है. यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो आने वाले समय में इसी मॉडल को अन्य अव्यवस्थित इलाकों में भी लागू किया जा सकता है.

किन गांवों को अधिग्रहण में किया जाएगा शामिल?

प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण में टीला शहबाजपुर, निस्तौली, नारायण नगर, अफजलपुर, शरीफाबाद और असालतपुर सहित कई गांवों को शामिल किया जा सकता है. पहले फेज में करीब 0.6488 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिस पर करीब 16.95 करोड़ रुपये खर्च हो सकता है. वहीं दूसरे फेज में करीब 11.75 करोड़ रुपये और तीसरे चरण में करीब 19.08 करोड़ रुपये का बजट अनुमानित किया गया है.

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