औरैया: BSF जवान ने पुलिस पर लगाया मारपीट का आरोप; CCTV फुटेज से खुलासा
औरैया के दिबियापुर में BSF जवान गिरेंद्र सिंह और पुलिस के बीच विवाद। जवान ने लगाया पिटाई का आरोप, पुलिस ने CCTV फुटेज जारी कर दावों को बताया भ्रामक। जानें पूरा मामला।
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र में एक बीएसएफ जवान और पुलिस के बीच विवाद सामने आया है, जिसने इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. बीएसएफ में तैनात जवान गिरेंद्र सिंह ने दिबियापुर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पारिवारिक विवाद के मामले में उसे थाने लाया गया और वहां उसके साथ मारपीट की गई. जवान का कहना है कि पुलिस की पिटाई से उसे चोटें आईं और वह खून से लथपथ हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिबियापुर में इलाज कराने पहुंचा.
जानकारी के मुताबिक, गिरेंद्र सिंह पंजाब के जलालाबाद में बीएसएफ की 158 बटालियन में तैनात हैं. घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी मामला तेजी से वायरल हुआ और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे. हालांकि, पुलिस ने जवान के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. थाना प्रभारी दिबियापुर पंकज मिश्रा के अनुसार 31 मई की रात करीब 8 बजे जवान की पत्नी पूजा के भाई राजेश सिंह उर्फ अभि सिंह ने फोन कर सूचना दी थी कि गिरेंद्र अपनी पत्नी के साथ मारपीट कर रहा है.
थाने में हुआ समझौता
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन उस समय गिरेंद्र सिंह ने खुद और अपनी पत्नी को थाने आने से मना कर दिया था. पुलिस के मुताबिक, बाद में गिरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी पूजा थाना दिबियापुर के मिशन शक्ति केंद्र पहुंचे, जहां दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई गई. इस दौरान पति-पत्नी ने आपसी सुलह-समझौते की बात कही और साथ रहने पर सहमति जताई. पुलिस का कहना है कि इसके बाद दोनों को सुरक्षित रवाना कर दिया गया.
CCTV में नहीं मिले मारपीट के सबूत
वहीं पूरे मामले पर क्षेत्राधिकारी सदर अशोक कुमार सिंह ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है. उन्होंने बताया कि थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज में गिरेंद्र सिंह अपनी पत्नी और परिजनों के साथ रात 9 बजकर 50 मिनट पर सकुशल थाने से बाहर जाते दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद 9 बजकर 54 मिनट पर भी वह अपनी पत्नी और परिजनों के साथ थाने के बाहर सड़क पर नजर आ रहे हैं. उपलब्ध CCTV फुटेज में कहीं भी पुलिसकर्मी जवान के साथ मारपीट करते नजर नहीं आ रहे हैं.
पुलिस ने जवान के आरोपों को भ्रामक बताया
उन्होंने जवान की ओर से लगाए गए आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया है. साथ ही कहा है कि सोशल मीडिया पर पुलिस के खिलाफ गलत जानकारी प्रसारित की गई है, जिसका खंडन किया जाता है. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि झूठी सूचना फैलाने और भ्रामक खबर प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मामले में एक तरफ बीएसएफ जवान के गंभीर आरोप हैं तो दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन का दावा है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं. अब इस पूरे प्रकरण की सच्चाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ सकेगी.