बहू की ममता: 85 वर्षीय सास को टब में बैठाकर कराई 84 कोस की परिक्रमा
मथुरा की बहू काजल चौधरी ने पेश की सेवा की मिसाल। 85 वर्षीय सास की इच्छा पूरी करने के लिए टब में बैठाकर पूरी की 84 कोस की कठिन परिक्रमा। पढ़ें भावुक खबर।
नूंह:आज के दौर में जहां संयुक्त परिवारों की परंपरा कमजोर पड़ती नजर आ रही है. वहीं, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलां निवासी प्रीति उर्फ काजल चौधरी ने सेवा, सम्मान और संस्कारों की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है. काजल अपनी 85 वर्षीय सास चंद्रो देवी को टब में बैठाकर पवित्र ब्रज 84 कोस परिक्रमा करा रही हैं.
सास की आस्था को बनाया अपना संकल्प: दरअसल, बुजुर्ग होने के कारण चंद्रो देवी खुद पैदल परिक्रमा करने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन उनकी धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी इच्छा को पूरा करने का जिम्मा उनकी बहू ने अपने कंधों पर उठा लिया है. कई किलोमीटर लंबी और कठिन इस यात्रा में काजल लगातार अपनी सास को साथ लेकर चल रही हैं. यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान का भी संदेश दे रही है.
31 मई से शुरू हुई यात्रा: काजल चौधरी ने यह परिक्रमा 31 मई को पलवल जिले के बंचारी गांव से शुरू की थी. कई दिनों की कठिन यात्रा के बाद यह परिक्रमा शनिवार को बंचारी गांव में संपन्न होगी. रास्ते भर विभिन्न गांवों और कस्बों में लोगों ने उनका स्वागत किया और उनकी सेवा भावना को नमन किया.
मेवात की ब्रज भूमि में उमड़ा सम्मान: वहीं, शुक्रवार को परिक्रमा के दौरान काजल चौधरी मेवात क्षेत्र के बिछौर गांव पहुंचीं. यहां उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए. डीजे बजाकर, फूलों की माला पहनाकर और फूलों की वर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया. वहीं, लोगों ने नोटों की मालाएं पहनाकर उनको सम्मानित किया. खास बात यह रही कि स्वागत कार्यक्रम में सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर काजल और उनकी सास का अभिनंदन किया.
काजल बोलीं- “सास नहीं, मां हैं वो”: इस दौरान प्रीति उर्फ काजल चौधरी ने कहा कि, “मेरी सास मेरे लिए मां के समान हैं. उनकी इच्छा थी कि वह ब्रज 84 कोस परिक्रमा करें. जब वह स्वयं नहीं चल सकती थीं तो मैंने तय किया कि उनकी आस्था को अधूरा नहीं रहने दूंगी. यह मेरा कर्तव्य और सौभाग्य है.”
सेवा और संस्कारों की मिसाल: वहीं, जल अभिषेक यात्रा कमेटी के अध्यक्ष नाथूराम ने कहा कि, “मेवात की पहचान हमेशा भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की रही है. काजल चौधरी का स्वागत इसी एकता का प्रतीक है. उन्होंने सेवा और संस्कारों की ऐसी मिसाल पेश की है, जो पूरे समाज को प्रेरित करती है.” इसके अलावा प्रधान इस्माइल ने कहा कि, “आज के समय में ऐसा उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है. काजल चौधरी ने जिस तरह अपनी सास की सेवा की है, वह सभी के लिए प्रेरणा है.” वहीं ग्रामीण जुनेद ने कहा कि, “यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि इंसानियत, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों का संदेश है. ऐसे कार्य समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं.”
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी काजल: बता दें कि ब्रज 84 कोस परिक्रमा को अत्यंत कठिन धार्मिक यात्राओं में माना जाता है. ऐसे में 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला को साथ लेकर इस यात्रा को पूरा करना असाधारण काम है. काजल चौधरी ने साबित किया है कि यदि परिवार में प्रेम, सम्मान और संस्कार हों तो रिश्ते केवल निभाए नहीं जाते, बल्कि समाज के लिए उदाहरण बन जाते हैं. उनकी यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को बुजुर्गों के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों का महत्व समझाने का काम करेगी.