गोहाना: घेवर बेचकर गौसेवा, पिनाना गांव के युवाओं ने दान किए 2 करोड़
गोहाना के पिनाना गांव में दो दोस्तों की अनूठी पहल। घेवर की बिक्री से हुए मुनाफे से अब तक 2 करोड़ रुपये की गौसेवा। जानें कैसे शुरू हुआ यह प्रेरणादायक अभियान।
गोहाना : गोहाना के गांव पिनाना में दो दोस्तों ने घेवर की कमाई को गौसेवा और समाजसेवा का माध्यम बनाकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। गांव में संचालित घेवर मित्र मंडली पिनाना फाउंडेशन के माध्यम से पिछले छह वर्षों से घेवर बेचकर होने वाले मुनाफे को गौवंश की सेवा और सामाजिक कार्यों में दान किया जा रहा है। खास बात यह है कि अब तक यह संस्था एक करोड़ 97 लाख 55 हजार रुपये से अधिक की राशि दान कर चुकी है। आज सावन सीजन के लिए लगाए गए घेवर स्टॉल का फीता काटकर शुभारंभ किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्य लोग पहुंचे।
हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर भटकता नजर आता है। ऐसे समय में गांव पिनाना के राकेश और अमित ने गौसेवा का बीड़ा उठाया। दोनों दोस्तों ने वर्ष 2020 में सावन माह के दौरान गांववासियों के सहयोग से घेवर बनाना शुरू किया और फैसला किया कि इससे होने वाला पूरा मुनाफा गौसेवा और सामाजिक कार्यों में लगाया
आज यह पहल एक बड़े अभियान का रूप ले चुकी है। संचालकों के अनुसार अब तक घेवर बिक्री से होने वाले मुनाफे में से एक करोड़ 97 लाख 55 हजार रुपये से अधिक की राशि दान की जा चुकी है। इस वर्ष भी घेवर बिक्री से होने वाली पूरी कमाई गौवंश की सेवा के लिए समर्पित की जाएगी। संस्था द्वारा तैयार किया जाने वाला घेवर शुद्ध देसी घी से बनाया जाता है और लोगों को उचित कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। संस्था का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज को गौसेवा से जोड़ना है।
स्टॉल के उद्घाटन अवसर पर खरखौदा के विधायक पवन खरखौदा, पूर्व जिला अध्यक्ष जसबीर दोदवा और तीर्थ राणा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। वहीं खरीदारी करने पहुंचे लोगों ने कहा कि यहां उन्हें शुद्ध देसी घी का घेवर मिलता है और उसकी कमाई गौसेवा में लगती है, जिससे वे भी इस पुण्य कार्य में सहभागी बनते हैं।
घेवर की मिठास के साथ गौसेवा का संदेश देने वाली यह पहल न केवल समाज के लिए प्रेरणा बन रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि यदि सेवा का भाव हो तो छोटा प्रयास भी करोड़ों रुपये की मदद और बड़े बदलाव का माध्यम बन सकता है।