प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: 70 लाख युवाओं को मिला रोजगार

पीएम विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 70 लाख से ज्यादा युवाओं को मिला रोजगार। सरकार ने 15 लाख नौकरियों के लिए ₹2,400 करोड़ का प्रोत्साहन जारी किया। जानें योजना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जानकारी देते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ (PM-VBRY) के तहत अब तक देश भर में 70 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है. उन्होंने 15 लाख नई नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए 2,400 करोड़ रुपये के इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) जारी किए. सरकार की यह प्रमुख रोजगार-बेस्ड इंसेंटिव योजना पिछले साल अगस्त में शुरू की गई थी.

इसका मकसद पहली बार नौकरी ढूंढने वालों की मदद करना और अलग-अलग सेक्टर में सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) का दायरा बढ़ाना था. एक कार्यक्रम में, मोदी ने 15 लाख रोज़गार के अवसर पैदा करने में मदद के लिए पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भेजी.

योजना की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि अब तक लगभग 70 लाख नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं और इतनी ही संख्या में पहली बार नौकरी करने वाले लोगों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाया गया है. उन्होंने आगे बताया कि लगभग 20 लाख युवाओं ने अपनी पहली नौकरी में छह महीने पूरे कर लिए हैं, जबकि लगभग 10 लाख लाभार्थियों को यह पड़ाव पूरा करने पर योजना के तहत प्रोत्साहन राशि मिल भी चुकी है. मोदी के अनुसार, यह मदद सिर्फ आर्थिक सहायता से कहीं ज्यादा है. यह युवाओं की कड़ी मेहनत के प्रति देश की मान्यता और उनके भविष्य में देश के भरोसे को दर्शाती है.

रोजगार पैदा करना एक राष्ट्रीय मिशन

मोदी ने कहा कि जब सरकार, इंडस्ट्री और युवा मिलकर काम करते हैं, तो रोजगार पैदा करने की गति बढ़ती है. यह पहल एक ऐसे नए भारत की झलक है जहां युवाओं को अवसर मिलते हैं, इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलता है और रोज़गार पैदा करना एक राष्ट्रीय मिशन बन जाता है. मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना सिर्फ एक रोजगार योजना से कहीं ज्यादा है.

यह पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं की उम्मीदों को मजबूत करने और इंडस्ट्री व वर्कफोर्स (कामकाजी लोगों) के बीच एक मज़बूत पुल बनाने के लिए बनाई गई एक पहल है. उन्होंने कहा कि जहां कई योजनाएं आमतौर पर या तो कर्मचारियों या नियोक्ताओं पर केंद्रित होती हैं, वहीं यह कार्यक्रम एक साथ दोनों का समर्थन करता है.

उन्होंने कहा कि सरकार उन युवाओं के साथ खड़ी है जो अपना प्रोफेशनल सफर शुरू कर रहे हैं और उन संस्थानों को प्रोत्साहित करती है जो रोज़गार के नए अवसर पैदा करते हैं. मोदी ने जोर देकर कहा कि पिछले बारह वर्षों में सरकार ने रोज़गार के हर रास्ते को मजबूत करने के लिए काम किया है.

मोदी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इकॉनमी, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं. ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फ़ॉर लोकल’, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाने के प्रयास और ‘मिशन मैन्युफैक्चरिंग’ जैसी पहलों ने रोज़गार और स्वरोज़गार दोनों के लिए रास्ते बढ़ाए हैं.

ईपीएफओ को आधुनिक बनाने का काम

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार रोजगार को सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन (EPFO) को आधुनिक बनाने, पेंशन सिस्टम को सरल बनाने और लाखों श्रमिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और सस्ती स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. यही सोच सरकार द्वारा किए गए श्रम सुधारों का आधार है.

प्रधानमंत्री ने भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में महिलाओं के बढ़ते योगदान पर भी प्रकाश डाला. मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि नाइट-शिफ्ट में काम करने, वर्क-फ़्रॉम-होम के अवसरों को बढ़ावा देने और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने से जुड़े सुधारों का उद्देश्य वर्कफ़ोर्स में महिलाओं की भागीदारी को और बढ़ाना है.

उन्होंने इक्कीसवीं सदी में आर्थिक सफलता तय करने में कुशल टैलेंट, इनोवेशन और क्वालिटी के महत्व पर भी ज़ोर दिया. उनके अनुसार, जिन देशों में ये खूबियां होंगी, उन्हें सबसे ज्यादा मौके मिलेंगे और भारत में इन तीनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व क्षमता है. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में मौके उन देशों को मिलेंगे जो कुशल टैलेंट को बढ़ावा देते हैं, इनोवेशन को प्रोत्साहित करते हैं और क्वालिटी के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में इन तीनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व क्षमता है.

10 में 14 करोड़ जॉब

इस मौके पर केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि 2014 से 2024 के बीच लगभग 17 करोड़ नौकरियां पैदा हुईं, जबकि 2014 से पहले के दस वर्षों में 2.9 करोड़ नौकरियां पैदा हुई थीं. मंडाविया ने बताया कि 2017 और 2023 के बीच भारत की रोज़गार इलास्टिसिटी 1.11 थी, जिसका मतलब है कि ग्रॉस वैल्यू एडेड में हर 1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रोज़गार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछली सरकारों के समय रोज़गार इलास्टिसिटी 0.008 दर्ज की गई थी. उन्होंने भारत की बेरोजगारी दर में आई कमी की ओर भी ध्यान दिलाया, जो अब लगभग 3.1 प्रतिशत है और 4.8 प्रतिशत के वैश्विक औसत से कम है.

PM-VBRY की खास बातें

  1. PM-VBRY 1 अगस्त, 2025 को लागू हुई थी और इसे औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और नौकरियां पैदा करने के लिए प्रोत्साहन देने के मकसद से बनाया गया है.
  2. इस योजना के भाग A के तहत, EPFO ​​के साथ रजिस्टर्ड पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारी, जिनकी मासिक आय 1 लाख रुपये तक है, वे दो किश्तों में एक महीने की सैलरी के बराबर (अधिकतम 15,000 रुपये तक) प्रोत्साहन पाने के हकदार हैं.
  3. योजना के भाग B के तहत, अतिरिक्त रोजगार पैदा करने वाले नियोक्ता (employer) दो साल की अवधि के लिए प्रति अतिरिक्त कर्मचारी 3,000 रुपये प्रति माह तक के प्रोत्साहन के हकदार हैं.
  4. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के नियोक्ता अतिरिक्त दो साल के लिए प्रोत्साहन पाने के हकदार हैं.
  5. कुल 99,446 करोड़ रुपये के बजट के साथ, PM-VBRY का लक्ष्य दो साल की अवधि में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करना है.
  6. इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थियों के पहली बार वर्कफोर्स (कामकाजी आबादी) में शामिल होने की उम्मीद है.
  7. अगस्त 2025 से, PM-VBRY के तहत 70 लाख से अधिक पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को औपचारिक वर्कफोर्स में शामिल किया गया है, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं.
  8. जो कर्मचारी छह महीने से अधिक समय तक लगातार नौकरी में बने रहते हैं, वे इस योजना के तहत लाभ पाने के हकदार हो जाते हैं.
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