अखिलेश यादव का 53वां जन्मदिन: मुरादाबाद में 53 फीट लंबा केक, रुचि वीरा का दावा

मुरादाबाद में अखिलेश यादव के जन्मदिन पर कटा 53 फीट लंबा केक। सांसद रुचि वीरा ने 2027 में पूर्ण बहुमत और अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने का किया दावा।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उत्साह के साथ पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाया. इस मौके पर मुरादाबाद की लोकसभा सांसद रुचि वीरा की तरफ से एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. खास बात ये है कि इस दौरान 53 फीट लंबा केक काटा गया. सांसद रुचि वीरा ने केक काटा और पार्टी कार्यकर्ताओं को खिलाया. ये वही रुचि वीरा हैं जिनका नाम कमाल अख्तर के साथ विवाद में सामने आया है, जिसके बाद अख्तर ने विधानमंडल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) पद से इस्तीफा दे दिया.

मीडिया से बात करते सांसद रुचि वीरा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके दीर्घायु होने और आगामी समय में प्रदेश की कमान संभालने की कामना की. इसके साथ ही, उन्होंने संगठन के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान, टिकट वितरण के फैसलों, महिला सम्मान से जुड़े गंभीर प्रकरणों और विपक्षी नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी पर भी प्रतिक्रिया दी.

अखिलेश के जन्मदिन पर 53 फीट लंबा केक

उन्होंने बताया कि अलवीना बेकरी वालों ने बेहद शॉर्ट नोटिस पर बहुत ही खूबसूरत और 53 फीट लंबा केक तैयार किया. उन्होंने आगे कहा कि आज के पावन दिन पर वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की लंबी आयु, उनके उज्ज्वल भविष्य और आने वाले चुनावों के को लेकर उनके लिए प्रार्थना करती हैं. सांसद ने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव का आने वाला वक्त, वर्ष 2012 और 2017 के कार्यकाल से भी कहीं अधिक शानदार और ऐतिहासिक रहेगा है.

मुख्यमंत्री बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर

आगामी राजनीतिक लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए सांसद ने कहा कि वर्ष 2027 से 2032 तक का कार्यकाल प्रदेश के लिए स्वर्णिम होगा है. उन्होंने कहा कि पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देंगे, ताकि वे समाज के हर तबके की भलाई के लिए काम कर सकें.

‘शीर्ष नेतृत्व का हर फैसला सर्वोपरि’

पार्टी के भीतर टिकटों के बदलाव और अंदरूनी फैसलों को लेकर पूछे गए सवाल पर रुचि वीरा ने कहा कि इन सभी विषयों और फैसलों के बारे में उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष ही पूरी तरह से मालिक हैं. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने जो भी फैसला लिया है, उसे वही बेहतर जानते हैं क्योंकि वे पार्टी के मुखिया हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जी द्वारा पार्टी की भलाई और बेहतरी के लिए जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह पूरी तरह से सर्वमान्य है और वे ही इसके अंतिम फैसले के हकदार हैं. सांसद ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णय ही सर्वोपरि हैं और उनका पूरा ध्यान केवल और केवल संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर केंद्रित है.

राजनीतिक गलियारों में महिला सम्मान और उनके द्वारा की गई पुरानी शिकायतों को लेकर चल रही चर्चाओं पर सांसद रुचि वीरा ने स्पष्ट किया कि उनकी किसी भी पुरानी शिकायत या बात से इस वर्तमान प्रकरण का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. इस बयान के जरिए उन्होंने आंतरिक विवादों की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उनका इशारा कमाल अख्तर की तरफ था जिन्होंने विधानमंडल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) पद से इस्तीफा दे दिया है.

मुरादाबाद की सभी सीटें जीतने का दावा

मुरादाबाद जनपद की राजनीतिक जमीन पर बात करते हुए सांसद ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि निश्चित ही वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद जनपद की छहों की छहों सीटें समाजवादी पार्टी की झोली में आएंगी. उन्होंने कहा कि एक प्रचंड बहुमत के साथ अखिलेश प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और राज्य में विकास का एक नया दौर शुरू होगा.

पोस्टरों-फोटो से गायब होने पर क्या बोलीं

पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलनों के पोस्टरों या फोटो में जगह न मिलने के सवाल पर सांसद ने कहा कि यह सब अब पुरानी बातें हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि वो वैसे भी किसी फोटो या पोस्टर में आने की कोई तलबगार (इच्छुक) नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उनका मुख्य मकसद केवल काम करना है और वो दिन-रात जमीनी स्तर पर पीडीए के सिद्धांतों के लिए काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वो हर वर्ग के कमजोर लोगों के सुख-दुख, तीज-त्योहारों में हमेशा उनके बीच उपस्थित रहती हैं और जिन्हें भी उनकी जरूरत होती है, वो उनके साथ मजबूती से खड़ी रहती हैं.

राजभर के ‘सीजनल सन्यासी’ वाले बयान पर पलटवार

वहीं विपक्षी दल के नेता ओम प्रकाश राजभर द्वारा चुनाव के समय सक्रिय होने वाले नेताओं को ‘सीजनल सन्यासी’ कहे जाने वाले तंज पर सांसद रुचि वीरा ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश राजभर जी की बातों को कोई भी गंभीरता से ना ले. उन्होंने कहा कि उनकी बयानबाजी को इतनी तवज्जो देने की कोई आवश्यकता नहीं है.

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