‘सरकारी नौकरी चाहिए तो सरकारी शिक्षा पर भी रखें भरोसा’ — पंचकूला कॉलेज पहुंचे शिक्षा मंत्री
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा ने पंचकूला सरकारी कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रों के साथ बेंच पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं।
चंडीगढ़ : हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर बच्चे और अभिभावक सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जब पढ़ाई की बात आती है तो निजी स्कूलों और कॉलेजों को अधिक बेहतर मानने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। सरकार इस सोच को बदलने के लिए सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का शैक्षणिक स्तर सुधारने के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है, ताकि विद्यार्थी सरकारी संस्थानों में भी पूरे मन और विश्वास के साथ पढ़ाई कर सकें। शिक्षा मंत्री ने यह बात पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित सरकारी कॉलेज के औचक निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कही। निरीक्षण के दौरान उनका अंदाज औपचारिक कम और आत्मीय अधिक नजर आया। उन्होंने छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के संबंध में सीधे विद्यार्थियों से सुझाव लिए।
बेंच पर बैठकर छात्रों से की लंबी बातचीत
महीपाल ढांडा कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के बीच पहुंचे तो उन्होंने किसी तरह की औपचारिक दूरी बनाए रखने के बजाय छात्रों के साथ बेंच पर बैठकर बातचीत की। उन्होंने पढ़ाई, कॉलेज की सुविधाओं, प्रवेश प्रक्रिया और विद्यार्थियों को आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान मंत्री ने छात्रों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर उनके विचार भी जाने।
मंत्री का यह सादगी भरा और दोस्ताना अंदाज विद्यार्थियों को खूब पसंद आया। बातचीत के दौरान हंसी-मजाक का माहौल भी बना रहा। छात्रों ने खुलकर अपनी बात रखी और मंत्री ने भी उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना। इससे कॉलेज परिसर में कुछ समय के लिए माहौल पूरी तरह संवादात्मक नजर आया।
सरकारी नौकरी चाहिए तो सरकारी शिक्षा पर भी भरोसा जरूरी
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान शिक्षा मंत्री ने सरकारी नौकरी और सरकारी शिक्षा के बीच दिखाई देने वाले अंतर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज में सरकारी नौकरी को लेकर जिस प्रकार का भरोसा है, उसी तरह का विश्वास सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा व्यवस्था में भी पैदा करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगारपरक शिक्षा देकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
‘नो एंट्री’ नोटिस पर जताई नाराजगी
औचक निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री ने कॉलेज में चुनावी स्ट्रॉन्ग रूम और एडमिशन ब्लॉक पर लगे ‘NO ENTRY WITHOUT PERMISSION’ के नोटिस पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि इस प्रकार के नोटिस तत्काल हटाए जाएं। उनका कहना था कि कॉलेज विद्यार्थियों और आमजन से जुड़ा शिक्षण संस्थान है, इसलिए परिसर में अनावश्यक रूप से ऐसी रोक-टोक का माहौल नहीं होना चाहिए।मंत्री ने कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं रखने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंच बनाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
विद्यार्थियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहें अधिकारी
महीपाल सिंह ढांडा ने कॉलेज प्राध्यापकों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विद्यार्थियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां विद्यार्थी बिना झिझक अपनी बात रख सकें और उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, करियर और भविष्य की दिशा तय करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
रोजगारपरक शिक्षा सरकार की प्राथमिकता
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यार्थी देश का भविष्य हैं और उन्हें अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल देश निर्माण में करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ कौशल विकास, नई तकनीक और बदलते रोजगार अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की व्यवस्था में लगातार सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का असर दाखिलों और परीक्षा परिणामों में भी दिखाई देने लगा है। सरकार का लक्ष्य सरकारी शिक्षण संस्थानों को ऐसा मजबूत विकल्प बनाना है, जहां विद्यार्थी गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए निजी संस्थानों की ओर जाने के बजाय सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता दें।
औचक निरीक्षणों से व्यवस्था सुधारने पर जोर
शिक्षा मंत्री के लगातार औचक निरीक्षणों को भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। इन दौरों के माध्यम से जहां जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद कर कमियों की पहचान की जा रही है।
पंचकूला के सरकारी कॉलेज में हुआ निरीक्षण भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। मंत्री का छात्रों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनना और अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश देना इस संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में केवल भवन और सुविधाएं बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में उनके प्रति भरोसा पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।