नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 1000 अवैध सर्विस सेंटर कर रहे 30 करोड़ लीटर पानी बर्बाद, NGT सख्त
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगभग 1000 अवैध वाहन धुलाई केंद्र हर महीने 30 करोड़ लीटर भूजल बर्बाद कर रहे हैं। एनजीटी ने 4 हफ्ते में नई रिपोर्ट मांगी।
एनजीटी ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अवैध वाहन धुलाई केंद्रों पर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने यूपी पलूशन कंट्रोल बोर्ड और राज्य के भूगर्भ जल विभाग को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अवैध वाहन धुलाई केंद्रों के संबंध में नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगभग 1,000 अवैध वाहन धुलाई केंद्र हर महीने 30 करोड़ लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। एनजीटी ने 4 हफ्ते में नई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
30 करोड़ लीटर पानी कर रहे बर्बाद
एनजीटी ने एक अखबार की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है जिसमें दावा किया गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वाहनों की धुलाई करने वाले करीब 1,000 अवैध केंद्र हैं जो हर महीने लगभग 30 करोड़ लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं।
क्या कहती है सरकार की रिपोर्ट?
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के भूगर्भ जल विभाग ने अपनी रिपोर्ट में गौतम बुद्ध नगर में 193 वाहन धुलाई केंद्रों की पहचान किए जाने की जानकारी दी है। इनमें 55 औद्योगिक क्षेत्रों में जबकि 138 गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में हैं।
23 इकाइयां अवैध
एनजीटी ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों में 55 में से केवल 14 इकाइयों के पास ही जरूरी मंजूरी है जबकि 12 इकाइयों के आवेदन लंबित हैं। एनजीटी ने कहा कि 23 इकाइयां बिना किसी अनुमति के संचालित होती पाई गईं जिन्होंने मंजूरी के लिए आवेदन भी नहीं किया था।
दो-दो लाख रुपये का जुर्माना
गौतबबुद्धनगर जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद ने इन इकाइयों पर उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दो-दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
आंकड़ों में अंतर का भी लिया संज्ञान
अधिकरण ने गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 138 इकाइयों के संबंध में कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के वकील ने उसे बताया कि इनमें से 100 इकाइयों की बिजली आपूर्ति पहले ही काट दी गई है। हालांकि, एनजीटी ने इस संबंध में यूपीपीसीबी से ‘पूरी रिपोर्ट’ मांगी है। एनजीटी ने प्राधिकारियों की ओर से दिए गए आंकड़ों में अंतर का भी संज्ञान लिया।
4 हफ्ते में मांगी नई अनुपालन रिपोर्ट
एनजीटी ने कहा कि यूपीपीसीबी की ओर से पेश वकील ने बताया कि 11 वाहन धुलाई इकाइयों के आंकड़ों में अंतर है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऐसी कुल 204 इकाइयां हैं जबकि जानकारी केवल 193 इकाइयों के संबंध में दी गई है। एनजीटी ने भूगर्भ जल विभाग और यूपीपीसीबी को चार हफ्ते के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।