दिल्ली में NCW चीफ विजया राहटकर के तीज समारोह में पहुंचीं सुनीता दुग्गल, रेखा गुप्ता भी रहीं मौजूद
दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग के तीज मिलन समारोह में सुनीता दुग्गल और रेखा गुप्ता हुईं शामिल। जानें तीज के महत्व पर क्या बोलीं सुनीता दुग्गल।
चंडीगढ़ : दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरमैन विजया राहटकर द्वारा आयोजित तीज मिलन समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ पूर्व सांसद, हरियाणा भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं उपाध्यक्ष सुनीता दुग्गल भी शामिल हुईं। समारोह में महिलाओं ने पारंपरिक उत्साह के साथ तीज पर्व मनाया।
इस अवसर पर तीज की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं पर चर्चा करते हुए सुनीता दुग्गल ने कहा कि तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में नारी की आस्था, समर्पण, प्रेम, पारिवारिक मूल्यों और प्रकृति के प्रति जुड़ाव का प्रतीक है।
सुहाग, प्रेम और अखंड सौभाग्य का पर्व
श्रीमती सुनीता दुग्गल ने कहा कि तीज का पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और पति की दीर्घायु की कामना से जुड़ा हुआ है। महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं तथा सोलह श्रृंगार कर अपनी आस्था व्यक्त करती हैं। तीज के अवसर पर घर-परिवार में उत्सव का माहौल बनता है और महिलाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर पर्व की खुशियां साझा करती हैं।
उन्होंने कहा कि तीज भारतीय परंपरा में नारी के धैर्य, तपस्या और संकल्प शक्ति को भी दर्शाती है। यह पर्व महिलाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ परिवार और समाज में प्रेम एवं सद्भाव का संदेश देता है।
शिव-पार्वती के पावन मिलन से जुड़ी मान्यता
धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए श्रीमती दुग्गल ने कहा कि तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की पौराणिक कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। अनेक जन्मों की तपस्या और साधना के बाद भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी पावन मिलन की स्मृति में तीज का पर्व मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि हरियाली तीज विशेष रूप से सावन मास में प्रकृति के नए रूप और शिव-पार्वती के प्रेम का संदेश लेकर आती है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर वैवाहिक सुख एवं परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।
कुंवारी कन्याओं के लिए भी विशेष महत्व
सुनीता दुग्गल ने कहा कि तीज का महत्व केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है। अनेक स्थानों पर कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए तीज का व्रत रखती हैं। इस प्रकार यह पर्व भारतीय समाज में विवाह संस्था, प्रेम और पारिवारिक संबंधों के महत्व को भी रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि तीज की परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही हैं। दादी-नानी से लेकर माताओं और बेटियों तक पर्व की परंपराओं को अपनाने से हमारी सांस्कृतिक विरासत मजबूत होती है।
हरियाली और मानसून के स्वागत का उत्सव
श्रीमती दुग्गल ने कहा कि तीज का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है। सावन में बारिश के बाद चारों तरफ हरियाली छा जाती है। पेड़-पौधों में नई जान आती है और वातावरण खुशनुमा हो जाता है। ऐसे समय में मनाया जाने वाला तीज पर्व प्रकृति के इस सुंदर रूप का स्वागत करता है।
महिलाएं हरे रंग के परिधान पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और पारंपरिक आभूषणों से सजती हैं। झूले डालने और लोकगीत गाने की परंपरा तीज के उल्लास को और बढ़ा देती है। लोकगीतों में महिलाओं की भावनाएं, पारिवारिक रिश्ते और प्रकृति के प्रति प्रेम अभिव्यक्त होता है।
बदलते समय में भी कायम है तीज की प्रासंगिकता
सुनीता दुग्गल ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश के बावजूद तीज की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। बल्कि ऐसे पर्व आज की पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। तीज महिलाओं को एक साथ आने, अपनी खुशियां साझा करने और सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता ही यही है कि यहां धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति, परिवार और सामाजिक सरोकारों को भी पर्वों में स्थान दिया गया है। तीज इसी समृद्ध परंपरा का सुंदर उदाहरण है।
नारी सम्मान और सांस्कृतिक विरासत का संदेश
श्रीमती दुग्गल ने कहा कि तीज का पर्व नारी शक्ति और उसके आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। महिलाओं की भागीदारी से ऐसे पर्व सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी महिलाओं को तीज की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हर परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और प्रेम लेकर आए तथा हमारी आने वाली पीढ़ियां भी भारतीय संस्कृति की इन गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाएं।