नोएडा जेपी विशटाउन धोखाधड़ी, मनोज गौड़ पर ED के गंभीर आरोप, 18 अगस्त को अगली सुनवाई

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 25 हजार होमबायर्स से जुटाए 13,833 करोड़ रुपये F1 ट्रैक और अस्पतालों में डायवर्ट करने का ED का आरोप।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने वाले करीब 25 हजार लोगों से जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के कथित डायवर्जन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। ED ने मंगलवार को कहा कि Jaypee Infratech Ltd (JIL) ने घर खरीदारों से जुटाई रकम का एक बड़ा हिस्सा आवासीय परियोजनाओं के निर्माण के बजाय फॉर्मूला वन ट्रैक, अस्पताल, चैरिटेबल ट्रस्ट और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ी गतिविधियों में कथित तौर पर इस्तेमाल किया।

25000 खरीदारों से जुटाए 13,833 करोड़ रुपये

ED के मुताबिक, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 25,000 होमबायर्स से कुल 32,825 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इनमें से 13,833 करोड़ रुपये कथित तौर पर दूसरी संस्थाओं और परियोजनाओं की ओर डायवर्ट किए गए। यानी जांच एजेंसी के दावे के मुताबिक, घर खरीदारों से मिले हर एक रुपये में से करीब 42 पैसे आवासीय परियोजनाओं के निर्माण पर खर्च नहीं हुए।

ED का दावा- 13,800 करोड़ रुपये का डायवर्जन हुआ

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि ये दलीलें जेपी इंफ्राटेक के पूर्व CMD मनोज गौड़ की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गईं। ED ने गौड़ को नवंबर 2025 में 2018 के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में करीब 13,800 करोड़ रुपये की होमबायर्स की रकम का कथित तौर पर डायवर्जन हुआ।

एक्सप्रेसवे और F1 ट्रैक तक बनाने में इस्तेमाल हुआ पैसा

ED की ओर से पेश स्टैंडिंग काउंसिल राहुल त्यागी ने कहा कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम छह अलग-अलग चैनलों के जरिए ऐसी संस्थाओं तक पहुंची, जिन पर गौड़ का नियंत्रण था। इनमें जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड, जयप्रकाश सेवा संस्थान और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड जैसी संस्थाएं शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल यमुना एक्सप्रेसवे और फॉर्मूला वन ट्रैक समेत अन्य गतिविधियों में किया गया।

ED ने यह भी आरोप लगाया कि गौड़ को 2009-10 से 2021-22 के बीच जयप्रकाश असोसिएट्स लिमिटेड से 48.91 करोड़ रुपये वेतन के तौर पर मिले, जबकि इस अवधि में कंपनी घाटे में थी। एजेंसी के मुताबिक, उनका वेतन कंपनी के कर्मचारियों की औसत तनख्वाह से एक समय 93 गुना तक अधिक था। इस मामले में जमानत पर अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी, जब गौड़ की ओर से ED के आरोपों का जवाब दिया जाएगा।

अधूरे पड़े हैं हजारों घर

मामले की जड़ में जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स जैसी आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों की शिकायतें हैं। नोएडा के सेक्टर 128 समेत कई सेक्टरों में फैले जेपी ग्रीन्स विशटाउन की कई संपत्तियां अब भी अधूरी हैं। इनमें से ज्यादातर घरों की बुकिंग 2011 में हुई थी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.