‘हर घर बिजली’ के दौर में 20 साल पुराने बिजली ढांचे से जूझ रहा नोएडा, RWA ने उठाए गंभीर सवाल
नए कनेक्शन पर कथित ‘अफोर्डेबल चार्ज’, मैनपावर की कमी और केंद्रीकृत सेवाओं पर नाराजगी; अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर भी उठाए सवाल
न्यूज़ डेस्क, नोएडा । राजेश/विवेक । उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं आईटी शहर नोएडा में बिजली आपूर्ति के बुनियादी ढांचे, नए कनेक्शन पर लगाए जा रहे कथित अतिरिक्त शुल्क और उपभोक्ता सेवाओं को लेकर आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने मंगलवार, 25 अगस्त को जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि शहर के तेजी से विस्तार के बावजूद कई स्थानों पर बिजली का बुनियादी ढांचा करीब दो दशक पुराना है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित बिजली कटौती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
‘अफोर्डेबल चार्ज’ को लेकर जताया विरोध
दिव्य कृष्णात्रेय ने दावा किया कि नया बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं पर ‘अफोर्डेबल चार्ज’ (Affordable Charge) के नाम पर भारी शुल्क लगाया जा रहा है। उन्होंने इसे नए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए शासन और बिजली विभाग से इस शुल्क की समीक्षा कर इसे वापस लेने की मांग की है।
आरडब्ल्यूए का कहना है कि जब उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तब नए कनेक्शन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है।
मैनपावर की कमी से फॉल्ट ठीक होने में लग रहा समय
प्रेस विज्ञप्ति में जिले में बिजली विभाग के पास पर्याप्त मैनपावर और तकनीकी कर्मचारियों की कमी का भी मुद्दा उठाया गया है। आरडब्ल्यूए का आरोप है कि कर्मचारियों की कमी के चलते कई बार सामान्य विद्युत फॉल्ट को ठीक करने में भी घंटों लग जाते हैं और इसका सीधा असर घरेलू तथा व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
बिल और मीटर संबंधी सेवाओं के विकेंद्रीकरण की मांग
आरडब्ल्यूए ने उपभोक्ता सेवाओं की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। दिव्य कृष्णात्रेय के मुताबिक बिजली बिल में गड़बड़ी होने पर उपभोक्ताओं को सेक्टर-18 स्थित केंद्र तक जाना पड़ता है। इसी प्रकार मीटर संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सीमित व्यवस्था होने के कारण लोगों को लंबी कतारों और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि बिल सुधार, मीटर संबंधी शिकायत और अन्य उपभोक्ता सेवाओं को सेक्टर-वार अथवा क्षेत्रवार विकेंद्रीकृत किया जाए, ताकि लोगों को अपने नजदीकी क्षेत्र में ही समस्याओं का समाधान मिल सके।
जनप्रतिनिधियों की खामोशी पर भी सवाल
दिव्य कृष्णात्रेय ने बिजली संबंधी समस्याओं पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लाखों नागरिकों और व्यापारियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और उपभोक्ताओं की समस्याओं को शासन एवं संबंधित विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाना चाहिए।
पुराने बिजली ढांचे को आधुनिक बनाने की मांग
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने शासन एवं बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से चार प्रमुख मांगें रखी हैं—पुराने एवं जर्जर बिजली ढांचे का आधुनिकीकरण, नए कनेक्शन पर लगाए जा रहे कथित ‘अफोर्डेबल चार्ज’ की समीक्षा एवं वापसी, पर्याप्त तकनीकी मैनपावर की उपलब्धता तथा बिल एवं मीटर संबंधी सेवाओं का विकेंद्रीकरण।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा, “‘हर घर बिजली’ का वास्तविक लाभ जनता को तभी मिलेगा, जब निर्बाध आपूर्ति, पारदर्शी शुल्क संरचना और सुलभ सेवाएं उपलब्ध होंगी।”
फिलहाल ये आरोप और दावे आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। संबंधित बिजली विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में समुचित स्थान दिया जाएगा।