यासीन मलिक और इंजीनियर रशीद समेत 7 पर मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय, ईडी की कार्रवाई

दिल्ली की एक अदालत ने आतंकी यासीन मलिक, सांसद इंजीनियर रशीद और अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है।

दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन JKLF (जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) के जेल में बंद प्रमुख यासीन मलिक और छह अन्य के खिलाफ धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, यह मामला अलगाववादी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान से हवाला के जरिए फंड लेने से संबंधित है। इस दौरान कोर्ट ने यासीन मलिक के अलावा अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह, बारामूला के सांसद शेख अब्दुल रशीद, जहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और मैसर्स ट्रिसन फ्रेम्स एंड कंस्ट्रक्शन के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।

विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 9 सितंबर को मलिक समेत इन सभी आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 (धनशोधन का अपराध) और 4 (धन शोधन के लिए सजा) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि सातों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया संदेह का मजबूत आधार है। एजेंसी का आरोप है कि इन आरोपियों ने अपने अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के लिए पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों से धन प्राप्त किया था।

‘आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह पैदा हो रहा’

इस बारे में जारी अपने आदेश में स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने कहा, ‘मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि प्रथम दृष्टया, रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है जिसके आधार पर सभी सात आरोपियों जहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, M/s ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड, मोहम्मद यासीन मलिक, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम और अब्दुल रशीद शेख के खिलाफ मजबूत संदेह पैदा होता है। इसलिए, इन आरोपियों पर PMLA की धारा 3 के तहत अपराध का आरोप लगाया जाना चाहिए, जो PMLA की धारा 4 के तहत दंडनीय है।’

30 सितंबर को नहीं किया जा सका था कोर्ट में पेश

अदालत के सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से 30 सितंबर को आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका था, जिसके बाद जज ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि वे उन जेलों में जाकर आरोपियों से आरोपों पर हस्ताक्षर करवाएं जहां वे बंद हैं। अदालत ने मामले की आगे की कार्यवाही के लिए 30 अक्टूबर की तारीख तय की है।

आरोपियों ने अपराध की कमाई के तौर पर नौ करोड़ जमा किए

ED ने अपनी जांच का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि आरोपियों ने अपराध से हुई कमाई के तौर पर 8.94 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम जमा की थी, जिसे उन्होंने अलग-अलग तरीकों और जरियों से हासिल किया, भेजा, ट्रांसफर किया, छिपाया, अपने पास रखा और इस्तेमाल किया था।

ईडी का यह मामला 2017 के राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) के मामले से संबंधित है, जिसमें एजेंसी ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता और गैर कानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (UAPA) के तहत आपराधिक साजिश समेत कई आरोप लगाये थे।

इसमें कहा गया कि जहूर अहमद शाह वटाली के साथ कैशियर-कम-अकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाले गुलाम मोहम्मद भट के घर से जब्त किए गए एक दोष साबित करने वाले दस्तावेज से पता चला कि आरोपी यासीन मलिक, शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम को 2015-2016 के दौरान वटाली के जरिए विदेशी चंदा मिला था।

फंड जुटाने दुनियाभर में बनाया बड़ा ढांचा

ED ने दावा किया, ‘आरोपी यासीन मलिक द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ईमेल से मिले और भेजे गए ईमेल से पता चलता है कि उसने आजादी की लड़ाई के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी, अलगाववादी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंड जुटाने के लिए दुनिया भर में एक बड़ा ढांचा और सिस्टम बनाया था, और उस फंड का इस्तेमाल न केवल उसके संगठन JKLF को बनाए रखने के लिए किया गया, बल्कि अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और जम्मू-कश्मीर में हिंसा फैलाने के लिए भी किया गया।’

क्या थी शब्बीर शाह की भूमिका

आरोप है कि मलिक को आपराधिक गतिविधियों से हुई कमाई के तौर पर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा का विदेशी फंड मिला था, जिसे उसने आगे हवाला के जरिए भेज दिया था। शब्बीर अहमद शाह के बारे में एजेंसी ने आरोप लगाया कि उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी उग्रवादी आंदोलन को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई और वह इसके मुख्य सूत्रधारों में से एक था। इसमें कहा गया, आरोपी शब्बीर शाह को पाकिस्तान में मौजूद हुर्रियत प्रतिनिधियों जैसे शफी शायर और महमूद सागर के जरिए पाकिस्तानी एजेंसियों का पूरा समर्थन मिला था।

सांसद शेख रशीद को मिल रहा था विदेशी फंड

एजेंसी ने दावा किया कि जेल में बंद बारामूला के सांसद शेख अब्दुल रशीद जिन्हें इंजीनियर रशीद के नाम से अधिक जाना जाता है, को विदेश से फंड मिल रहा था और उनके JKLF और विदेशों में मौजूद उसकी शाखाओं के साथ गहरे संबंध थे। एजेंसी ने दावा किया, ‘आरोपी यासीन मलिक के ईमेल अकाउंट से मिली मेल से भी इसकी पुष्टि होती है। इस मेल से साफ है कि ख्वाजा मंजूर अहमद चिश्ती ने यासीन मलिक के जरिए अब्दुल रशीद शेख को पैसे पहुंचाए थे।’ एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि सांसद ने 1 अक्टूबर, 2022 को PMLA के तहत दर्ज बयान में माना है कि उन्हें कई मौकों पर वटाली से पैसे मिले हैं।

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