पांच राज्यों के चुनाव से पहले नए राज्यपालों की नियुक्ति, दुष्यंत गौतम और सुधा यादव को बड़ी जिम्मेदारी

विधानसभा चुनावों से पहले नए राज्यपालों की नियुक्ति में दलित और ओबीसी नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। जानिए प्रमुख नियुक्तियां और उनके सियासी मायने।

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रपति भवन द्वारा राज्यपालों की नई नियुक्तियों की घोषणा की गई है, जिससे देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इन नई नियुक्तियों में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि झारखंड के वरिष्ठ नेता बृजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं, बीजेपी संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव को कर्नाटक का गवर्नर नियुक्त किया गया है।

⚖️ जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद: दलित, ओबीसी और राजपूत चेहरों को प्रतिनिधित्व

इन संवैधानिक नियुक्तियों को चुनाव से पहले सामाजिक और जातीय संतुलन साधने के राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। दुष्यंत गौतम (जाटव समुदाय) और बृजमोहन राम (धोबी समुदाय) की नियुक्ति के जरिए दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। वहीं, हरियाणा से आने वाली सुधा यादव (यादव समुदाय) और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता ढाल सिंह बिसेन (राजपूत समुदाय, जिन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है) के माध्यम से ओबीसी और सवर्ण मतदाताओं तक सकारात्मक संदेश पहुँचाने की रणनीति मानी जा रही है।

🔄 राज्यों के प्रभार में भी हुआ फेरबदल: दिनेश शर्मा और ओम प्रकाश माथुर की नई भूमिकाएं

नई नियुक्तियों के साथ-साथ कुछ मौजूदा राज्यपालों के प्रभार भी बदले गए हैं। केरला के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु भेजा गया है, जबकि सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर अब केरला की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया जा चुका है। चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश में जहाँ जातीय समीकरण जीत-हार तय करते हैं, वहाँ इन नियुक्तियों को व्यापक जनाधार मजबूत करने के कदम से जोड़कर देखा जा रहा है।

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