वेतन विसंगतियों को लेकर प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों का हाईवोल्टेज ड्रामा, बस के आगे लेटीं महिला डॉक्टर
लखनऊ में वेतन विसंगतियों को लेकर 40 दिन से प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में बस के आगे लेटकर जोरदार हंगामा किया।
वेतन विसंगतियों और अपनी अन्य मांगों को लेकर पिछले 40 दिनों से राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के समीप शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड डॉक्टरों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए जब पुलिस वाहन (बस) लेकर मौके पर पहुँची, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस द्वारा डॉक्टरों को बस में बैठाए जाने की कोशिश के दौरान महिला और पुरुष डॉक्टर आक्रोशित होकर बस के आगे लेट गए। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान तो कर नहीं सकती, इसलिए अब बस उनके ऊपर ही चढ़ा दे ताकि सारा खेल ही खत्म हो जाए।
🏛️ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर वादाखिलाफी का आरोप: 40 दिन बीतने के बाद भी नहीं पूरा हुआ आश्वासन
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। उनकी मुख्य शिकायत यह है कि समान डिग्री, बॉन्ड और कार्य की समान शर्तों के बावजूद उन्हें अलग-अलग और कम वेतन दिया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बीते 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उनकी समस्या सुनकर 24 घंटे के भीतर शासनादेश जारी करने और मांगें पूरी करने का स्पष्ट आश्वासन दिया था, लेकिन 40 दिन बीत जाने के बावजूद वह अपना वादा भूल गए और अब उन्हें जबरन हटाने के लिए पुलिस बल भेज दिया गया।
💸 वेतन समानता और एरियर भुगतान की मांग पर अड़े डॉक्टर
बॉन्डेड डॉक्टरों ने मांग की है कि उन्हें अन्य समकक्ष चिकित्सकों के समान वेतनमान दिया जाए और लंबित एरियर का भुगतान शीघ्र किया जाए। पुलिस और प्रशासनिक अमले द्वारा जब उन्हें जबरन उठाने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अप्रिय घटना से कुछ देर के लिए हजरतगंज इलाके में यातायात और व्यवस्था प्रभावित रही, और डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होता, उनका आंदोलन यूं ही जारी रहेगा।