Ghaziabad Aerocity Township: राजनगर एक्सटेंशन में बनेगी एयरोसिटी, GDA खरीदेगा 219 हेक्टेयर जमीन
राजनगर एक्सटेंशन में एयरोसिटी कमर्शियल टाउनशिप के लिए GDA जल्द 219 हेक्टेयर जमीन खरीदेगा। जानिए क्या हैं जमीन की दरें।
गाजियाबाद राजनगर एक्सटेंशन में एयरोसिटी कमर्शियल टाउनशिप के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) जल्द जमीन खरीदेगा। शुक्रवार को बोर्ड बैठक में जमीन खरीदने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब प्राधिकरण तीन विकल्पों से जमीन खरीदेगा। इसमें लैंड पुलिंग को प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनगर एक्सटेंशन के तीन गांव की जमीन पर एयरोसिटी बसाई जाएगी। इसमें मुख्य रूप से अटौर, मोरटी और मेवला अगरी गांव शामिल हैं। इन गांव की करीब 219.6131 हेक्टेयर जमीन पर टाउनशिप बसेगी, जिसमें से प्राधिकरण को यहां करीब 193.1256 हेक्टेयर जमीन किसानों से लेनी है।
इन दरों पर खरीदी जाएगी जमीन
किसानों से जमीन लेने के लिए कीमत भी तय हो चुकी है। इसमें जीडीए अटौर गांव की 107.5963 हेक्टेयर जमीन अर्जित करेगा। इस जमीन का सर्किल रेट 3,630 प्रति वर्ग मीटर है, जिसे 14,520 रुपये प्रति वर्ग मीटर से लिया जाएगा। मोरटी गांव की 55.3473 हेक्टेयर जमीन का सर्किल रेट 4,350 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जिसे 17,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर से लेना तय है। मेवला अगरी गांव की 30.1820 हेक्टेयर जमीन का सर्किल रेट 800 वर्ग मीटर है, जो 3,200 रुपये प्रति वर्ग मीटर से लेना प्रस्तावित है। इस पर प्राधिकरण 2831 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
टाउनशिप में किन्हें मिलेंगे प्लॉट
जीडीए बोर्ड ने शुक्रवार को किसानों से जमीन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब प्राधिकरण किसानों से जमीन लेगा। अधिकारी बताते हैं कि एयरोसिटी टाउनशिप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास बसाई जाएगी। यह पूरी तरह कमर्शियल टाउनशिप होगी। यहां कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस, होटल, रेस्तरां, मॉल, कॉलेज, स्पोर्ट्स क्लब, स्पोर्ट्स एकेडमी, गोल्फ कोर्स, दुकान, शोरूम के लिए प्लॉट कांटे जाएंगे।
लैंड पूलिंग को प्राथमिकता दी जाएगी
इस योजना के लिए जीडीए ने दो विकल्पों से जमीन लेना तय किया है। प्राधिकरण मुख्य रूप से किसानों से संपर्क कर लैंड पूलिंग के जरिये योजना में चिह्नित भूमि ले सकता है। इसे ही प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसान लैंड पूलिंग के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो किसानों से आपसी सहमति बनाकर भूमि लेने का प्रयास किया जाएगा। बताया गया है कि योजना से ली गई भूमि की 25 फीसदी विकसित भूमि जीडीए किसानों को देगा। इसमें जीडीए भूमि के लिए पहले रकम खर्च नहीं करेगा।