Gold-Silver Price: सोने-चांदी में भारी गिरावट, अगले हफ्ते जारी होंगे अहम आंकड़े

पिछले हफ्ते सोने में 3% और चांदी में 7% की गिरावट। अगले हफ्ते अमेरिका, चीन और भारत के महंगाई आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की नजर।

पिछले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली के दबाव के चलते दोनों कीमती धातुएं कमजोर रहीं. अब बाजार की नजर अगले सप्ताह आने वाले कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर होगी, जो सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं.

विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सोने पर पड़ सकता है. आमतौर पर वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, लेकिन हाल के दिनों में तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों का ध्यान दूसरी ओर खींचा है.

अमेरिका, चीन और भारत के आंकड़े होंगे अहम

अगले सप्ताह चीन और अमेरिका के व्यापार तथा महंगाई से जुड़े आंकड़े जारी होंगे. इसके अलावा अमेरिका के कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े और भारत के खुदरा महंगाई दर (CPI) के आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी. इन आंकड़ों से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर संकेत मिलेंगे, जिसका असर बुलियन बाजार पर पड़ सकता है. यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे. यदि ब्याज दरों को लेकर कोई बड़ा संकेत मिलता है तो इसका असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने-चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है.

पिछले हफ्ते कितनी गिरी कीमतें

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले सप्ताह 5,317 रुपये यानी 3.3 फीसदी टूटकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 18,461 रुपये यानी करीब 7 फीसदी गिरकर 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. कॉमेक्स (Comex) पर सोना करीब 5 फीसदी और चांदी लगभग 9 फीसदी तक फिसल गई.

अगले हफ्ते क्या रह सकता है रुख

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोने और चांदी में सुधार की बजाय करेक्शन का दौर नजर आ रहा है. मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरों की आशंका और मजबूत रुपये के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400-4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बना रहता है तो कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है. ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों को आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखनी चाहिए.

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