YEIDA Flat Possession: 15 साल से फंसे 5,000 खरीदारों के लिए बड़ी खबर, यमुना अथॉरिटी ने बनाया 8 महीने का प्लान

यमुना सिटी में 15 सालों से फंसी बिल्डर परियोजनाओं को लेकर YEIDA का बड़ा फैसला। 8 महीने में 5,000 खरीदारों को मिलेगा आशियाना। NCLT और कोर्ट में लंबित मामलों का निकलेगा समाधान।

यमुना सिटी की वर्षों से अटकी और अधूरी परियोजनाओं का आठ माह में समाधान कर खरीदारों को आशियाना दिलाने की तैयारी है। इसके लिए कानूनी राय और बिल्डरों से सीधे बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्राधिकरण के इस प्रयास से चार परियोजनाओं में डेढ़ दशक से फंसे लगभग पांच हजार खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अधिकारी ने बताया कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 11 बिल्डर परियोजनाएं हैं। इनमें से अमिताभ कांत समिति के तहत शहर सात परियोजनाएं 25 प्रतिशत रकम जमा करा चुकी हैं। इन परियोजनाओं में करीब छह हजार से अधिक खरीदार हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 450 खरीदारों की ही रजिस्ट्री हो सकी है।

प्राधिकरण के मुताबिक ग्रीनबे ने तीन हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल का बकाया चुकाया है, जिसके बाद अन्य फ्लैटों की रजिस्ट्रयां भी खोली गई है। इसके अलावा बिल्डर के सबलेसी अजय रियलकॉन और स्टार सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर ने भी कुछ रकम जमा कराई है। वहीं, चार परियोजनाएं ऐसी भी है, जिनके मामले एनसीएलटी और कोर्ट में विचाराधीन हैं। इनमें सेक्टर-26ए एसडीएस इंफ्राकॉन और सेक्टर-22डी स्थित ओरिस डेवलपर्स कोर्ट में विचाराधीन है।

सुपरटेक की सेक्टर-17ए सुपरटेक लिमिटेड और सेक्टर-22 डी सुपरटेक टाउनशिप एनसीएलटी में है। इन परियोजनाओं में पांच हजार से अधिक खरीदार फंसे हुए हैं। इनमें रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। ये चारों परियोजनाओं 15 वर्षों से अधिक समय से अधूरी पड़ी हुई है। यीडा के एसीईओ मनीष मीणा का कहना है कि अटकी और अधूरी पड़ी परियोजनाओं में फंसे खरीदारों को आशियाना दिलाने की तैयारी है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आठ माह में समाधान का प्रयास है।

पूरी रकम देने के बाद भी फ्लैट नहीं मिले

इन अधूरी परियोजनाओं में खरीदार फ्लैट की वर्षों पहले पूरी रकम जमा कर चुके, लेकिन परियोजना कोर्ट और एनसीएलटी में जाने के कारण खरीदारों को फ्लैट पर कब्जा नहीं मिल पाया। परियोजनाओं में जिन खरीदारों को कब्जे मिल चुके हैं, वह रजिस्ट्री के अलावा बिजली के कनेक्शन समेत मूलभूत सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में प्राधिकरण ने खुदा बीड़ा उठाते हुए मामलों के समाधान का रास्ता निकालने पर विचार किया है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.