इलेवन पावर को समानांतर बिजली लाइसेंस देने पर लगी रोक, हरियाणा सरकार के निर्देश पर HERC का बड़ा फैसला
HERC ने गुरुग्राम और नूंह में 'इलेवन पावर' को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने पर रोक लगा दी है। सरकार के निर्देश तक आगे की कार्रवाई स्थगित रहेगी।
चंडीगढ़ । गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर’ (Eleven Power) को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (Parallel Electricity Distribution License) देने की प्रक्रिया पर फिलहाल पूर्ण विराम लग गया है।
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इस संबंध में आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि जब तक राज्य सरकार के निर्देश प्रभावी रहेंगे, तब तक इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही आयोग ने निजी कंपनी द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए अलग से सुनवाई कराने की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया है।
📜 25 साल के लिए मिली थी मंजूरी, सरकार के निर्देश के बाद HERC ने रोकी प्रक्रिया
उल्लेखनीय है कि आयोग ने 19 अक्तूबर को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दोनों जिलों (गुरुग्राम और नूंह) में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी।
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कंपनी का रुख: कंपनी ने 21 अक्तूबर को लाइसेंस से जुड़ी सभी शर्तों को औपचारिक रूप से स्वीकार भी कर लिया था।
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सरकार का निर्देश: हालांकि, हरियाणा सरकार ने 26 अक्तूबर को बिजली अधिनियम की धारा 108 (1) का प्रयोग करते हुए आयोग को स्पष्ट निर्देश जारी किए कि प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न तो दिया जाए और न ही उसे लागू किया जाए।
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HERC की बाध्यता: आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों में सरकार के लिखित निर्देशों का पालन करना उसके लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है।
📢 बिजली कर्मचारियों ने बताया इसे अपनी बड़ी जीत, 3 नवंबर को मंत्री संग होगी बैठक
इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने सरकार व आयोग के इस फैसले को बिजली कर्मचारियों और जनहित की बड़ी जीत करार दिया है।
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आगामी बैठक: उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारी मोर्चा अब 3 नवंबर को प्रदेश के बिजली मंत्री के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों के अन्य लंबित मुद्दों और मांगों को प्रमुखता से उठाएगा।
🛑 निजी कंपनी को अलग से सुनवाई का अवसर देने से आयोग का साफ इंकार
कंपनी ने समानांतर लाइसेंस से संबंधित आगे की कार्रवाई रोकने से पहले आयोग से सूचना देने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने की मांग की थी, जिसे आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया।
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आयोग का तर्क: HERC ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के निर्देश पूरे प्रदेश पर समान रूप से लागू होते हैं। ऐसे में उन निर्देशों पर अमल के लिए किसी विशेष कंपनी को अलग से सुनवाई का मौका देने की कोई आवश्यकता नहीं है। जब तक सरकार का यह निर्देश प्रभावी रहेगा, तब तक आयोग इस मामले में कोई कदम आगे नहीं बढ़ाएगा।