उषा प्रियदर्शनी बनीं हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष, जानें पूरी खबर

हरियाणा सरकार ने उषा प्रियदर्शनी को महिला आयोग का नया अध्यक्ष और मीना परमार को उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद हुई ये नियुक्तियां।

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने उषा प्रियदर्शनी को हरियाणा महिला आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि मीना परमार को उपाध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही आयोग में पांच नए सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है. नवनियुक्त सदस्यों में भारती सैनी, सुनीता लोहचब, सुमन शहजादवाला, अनुकंपा गर्ग और सुनीता चौहान शामिल हैं. इन नियुक्तियों के बाद महिला आयोग एक बार फिर पूर्ण रूप से सक्रिय होकर महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई और नीतिगत सुझावों पर काम करेगा.

रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद हुई नियुक्तियां: नई नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं जब कुछ दिन पहले ही हरियाणा महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष रेणु भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. रेणु भाटिया ने 10 जून को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को अपना त्यागपत्र सौंपा था. हालांकि उनके इस्तीफे में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया था. रेणु भाटिया वर्ष 2022 से महिला आयोग की अध्यक्ष थीं. उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नियुक्त किया था और बाद में उनके कार्यकाल को आगे भी बढ़ाया गया था.

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क्या था पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में एक नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म के मामले की जांच के दौरान हुई. रेणु भाटिया अस्पताल पहुंची थीं और मामले की समीक्षा के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नर्सिंग स्टाफ से कड़ी पूछताछ की. इस दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो सामने आने के बाद नर्सिंग संगठनों ने आरोप लगाया कि महिला आयोग की अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से नर्सिंग स्टाफ का अपमान किया है और पूरे नर्सिंग समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाया है. इसके विरोध में पहले कुरुक्षेत्र और फिर पूरे हरियाणा में नर्सों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए.

पूरे प्रदेश में हुआ विरोध प्रदर्शन: हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन और अन्य नर्सिंग संगठनों ने रेणु भाटिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कई जिलों में सांकेतिक हड़तालें हुईं और उनसे सार्वजनिक माफी तथा पद से हटाने की मांग उठी. हालांकि रेणु भाटिया ने अपने बयान पर माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक संवेदनशील मामले में जवाबदेही तय करना था. विरोध बढ़ने के बीच उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. बाद में जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यदि उनके किसी कार्य या बयान से किसी को ठेस पहुंची हो तो वह उसके लिए खेद व्यक्त करती हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा महिलाओं के हित में काम करने का प्रयास किया.

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